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वेद हमारी समृद्ध संस्कृति की नींव : राज्यपाल

  • हि.प्र. उच्च न्यायालय में मनाया गया संविधान दिवस
  • राज्यपाल का मूल्य आधारित प्रणाली कायम रखने पर बल

शिमला: राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा है कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मूल्य आधारित प्रणाली और भी प्रासंगिक है जिसमें सुदृढ़ समाज के निर्माण के लिए व्यक्ति के अधिकार व कर्तव्य परिभाषित हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली की शुरूआत भारत में हुई जिसे बाद में पूरे विश्व ने अपनाया। इन मूल्यों को समाज के कल्याण के लिए हमारे संविधान में शामिल किया गया है।

राज्यपाल गत सांय यहां हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद की इकाई द्वारा संविधान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर बोल रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि हमारी समृद्ध संस्कृति व परम्पराएं है और यह प्रणाली महान संत मनु द्वारा विश्व को मानव संविधान के रूप में दी गई हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय संविधान हमें कर्तव्य, अहिंसा व सच्चाई इत्यादि की सीख देता है जो इस प्राचीन संविधान का मूल तत्व है और इस प्रणाली में कर्तव्यों के सभी पहलु समाहित हैं।

उन्होंने कहा कि वेद हमारी समृद्ध संस्कृति की नींव है जो ज्ञान तथा बुद्धिमत्ता के स्रोत्र हैं जिसे पूरा विश्व मानता है।  आचार्य देवव्रत ने कहा कि भारतीय सभ्यता सबसे पुरानी व समृद्ध है और हमारी इस सभ्यता में अधिकतर महत्वपूर्ण पहलु व्यक्तियों में मानव मूल्यों को स्थापित करने और सहानुभूति, दया, संवेदनशीलता इत्यादि जैसे प्रेरणादायक गुण विकसित कर एकता तथा भाईचारे को सुदृढ़ करते हैं जिससे समाज में शांति को बढ़ावा मिलता है।

उन्होंने सम्द्ध संस्कृति को कायम रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि लोगों को अपने समृद्ध पारम्परिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासतों के प्रति हमेशा सचेत रहना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में मनुष्य आत्मकेन्द्रित हो गया है और हम ‘वासुदेव कुटुम्बकम’ की अवधारणा को त्याग रहे हैं। उन्होंने विशेष कर बच्चों और युवाओं में इस भावना को पुनःजागृत करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि भविष्य की पीढ़ी गरीब, जरूरतमंद तथा पीड़ित मानवता के प्रति संवेदनशील बन सके। संविधान निर्माण में बाबा साहेब अम्बेदकर के योगदन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि बाबा साहेब की विचाधारा और शिक्षाएं सभी पीढ़ियों के लिए सत्यात्मक रूप से मान्य हैं।

मुख्य न्यायधीश मसूद अहमद मीर ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने संविधान को एक आदर्श दस्तावेज के रूप में पेश किया जिसमें स्वाधीनता के संघर्ष की आत्मा शामिल है जो भारतीय समाज के लोकाचार को प्रतिबिंबित करता है। ये मूल्य व आदर्श संविधान की प्रस्तावना में प्रदर्शित होते हैं और इन्हें संविधान की आत्मा के रूप में समझा जाना चाहिए।  मुख्य न्यायधीश ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने भाषा, जाति, नस्ल की विविधता के साथ देश को स्वतंत्रता, समानता, आपसी भाई-चारा और न्याय जैसे महान आदर्शो को शामिल कर एक सूत्र में पिरोने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय मूल्य किसी एक धर्म नहीं अपितु सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होते हैं और इन मूल्यों को समाज के सभी वर्गों द्वारा अपनाया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने हमेशा ही धार्मिक सहिष्णुता को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि संविधान में भारतीय उच्च मूल्य समाहित हैं जो भारतवर्ष में एक दस्तावेज के तौर पर स्वीकार्य हैं। उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री बी.पी. शर्मा ने कहा कि हमारा संविधान भारत के मूल्यों पर आधारित है जिसमें राष्ट्रीयता, धर्मनिर्पेक्षता, लिंग समानता, धार्मिक स्वतंत्रता, जाति, रंग तथा नस्ल के सभी बच्चों को शिक्षा का समान अधिकार उपलब्ध है।

अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष टी.एस. चौहान ने कहा कि परिषद एक अधिवक्ताओं का एक संगठन है जो भारतीय मूल्यों को बढ़ावा देने के उददेश्य से कार्य कर रहा है।  हि.प्र. उच्च न्यायालय के न्यायधीश, स्थानीय विधायक सुरेश भारद्वाज, महाधिवक्ता, भारत के सहायक महाअधिवक्ता, बार एसोसिएशन के सदस्य, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के अन्य अधिकारी, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विधि छात्र और अन्य गणमान्य लोग भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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