चांशल घाटी को साहसिक गतिविधियों के लिए किया जाए विकसित: वीरभद्र सिंह

चांशल घाटी को साहसिक गतिविधियों के लिए किया जाए विकसित: वीरभद्र सिंह

चांशल घाटी में कई किलोमीटर तक फैले ऐसे खुले हरे मैदान हैं, जो स्कींग एवं अन्य गतिविधियों के लिये उपयुक्त

चांशल घाटी में कई किलोमीटर तक फैले ऐसे खुले हरे मैदान हैं, जो स्कींग एवं अन्य गतिविधियों के लिये उपयुक्त

शिमला: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने आज यहां हि.प्र. पर्यटन विकास बोर्ड की 8वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि जिला शिमला के दूर-दराज क्षेत्र डोडरा-क्वार को जोड़ने वाली चांशल घाटी में साहसिक गतिविधियों तथा चांशल (4520 मीटर) की ढलानों पर स्कींग शुरू करने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। बैठक में शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा, मुख्य संसदीय सचिव मनसा राम, मुख्य सचिव वी.सी. फारका, जीएडी के सचिव मोहन चौहान, विभिन्न होटल उद्योगों के प्रतिनिधि भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण के अधिकारी तथा प्रदेश भर से गैर सरकारी सदस्य भी बैठक में उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने भारतीय पर्वतारोहण फेडरेशन की प्रस्तुति, जिसमें चांशल तथा इसके आस-पास ट्रैकिंग, पैराग्लाईडिंग, रीवर रॉफ्टिंग तथा स्कींग की अपार संभावनाओं को दर्शाया गया, को देखने के उपरांत कहा कि चांशल घाटी में कई किलोमीटर तक फैले ऐसे खुले हरे मैदान हैं, जो स्कींग एवं अन्य गतिविधियों के लिये उपयुक्त हैं। उन्होंने कहा कि यहां कुछ छोटी झीलें तथा किन्नौर जिले की सांगला घाटी, रामपुर व उत्तराखण्ड को जोड़ते हुए एक दर्जन से अधिक बर्फ से ढके ट्रेकिंग मार्ग हैं, जहां साहसिक खेल प्रेमियों तथा पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए और भी बहुत कुछ हैं।

मुख्यमंत्री  ने कहा कि 3978 मीटर ऊंचे रोहतांग दर्रे के मुकावले चांशल घाटी में आगन्तुकों के लिये बहुत कुछ है और अन्य सुविधाओं सहित इस क्षेत्र में सड़क नेटवर्क में सुधार लाने के प्रयास किए जाएंगे।

बैठक में कुछ रज्जू मार्ग परियोजनाओं के लिये छूट प्रदान करने पर भी चर्चा की गई। इन रज्जू मार्गों के लिये अनेक बार निविदाएं आमंत्रित करने के बावजूद कोई भी उपयुक्त अभिव्यक्ति प्राप्त नहीं हुई। इन परियोजनाओं में टोबा से नयना देवी, शाहतलाई से दियोट सिद्ध, न्यूगल से पालमपुर तथा सराहन से बशाल कण्डा शामिल हैं।

बैठक के दौरान पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिये पट्टे पर देने के बजाए बद्दी में एडवेंचर पार्क अथवा गोल्फ कोर्स विकसित करने के सुझाव आए। इसी प्रकार झटिंगरी (मण्डी), कुल्लू जिला के बंजार में शोझा तथा सिरमौर जिला के सुकेती को विकसित करने के लिए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बोली मानदण्डों को पुनर्गठित करने का निर्णय लिया गया।

यह भी अवगत करवाया गया कि हि.प्र. अधोसंरचना विकास गोर्ड के माध्यम से विभाग रज्जू मार्ग परियोजनाओं को विकसित करने की प्रक्रिया में लगा है, जिनमें 150 करोड़ रुपये की धर्मशाला से मैकलोडगंज परियोजना, जिसके लिए वन संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की जा चुकी है, आदी हिमानी से चामुण्डा तक 5.80 किलोमीटर रज्जू मार्ग परियोजना, जिसके संरेखण एवं सर्वेक्षण को अंतिम रूप दिया जा चुका है, 8.63 किलोमीटर पलचान से रोहतांग रज्जू मार्ग परियोजना तथा भुंतर से बिजली-महादेव रज्जू मार्ग परियोजना जिसके लिए बोली स्वीकार कर ली गई है और अनुबंध हस्ताक्षर करने के लिए औपचारिकताओं की प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री ने धर्मशाला, डलहौजी, कुल्लू, मण्डी, चिंतपूर्णी, नाहन, ऊना, हमीरपुर तथा ढली (शिमला) बस अड्डों के सुधार के निर्देश जारी किए। गत बैठक में परिवहन विभाग को इस सम्बन्ध में की गई कार्रवाही की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया था, जो ढली बस अड्डे में सुधार के सम्बन्ध में अभी भी प्रतिक्षित है।

बोर्ड ने पर्यटन को प्रोत्साहित करने वाली फिल्में बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की, जिसके लिए आरम्भ में 50 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई है तथा इसकी निविदाओं को भी अंतिम रूप दिया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने किन्नौर जिले में सपनी किले के जीर्णोंद्धार एवं बहाली कार्य को एक मुश्त पूरो करने का सुझाव दिया। शिमला जिले पन्द्रह-बीश क्षेत्र के सरपारा में नौ-नाग झील के विकास एवं सौंदर्यीकरण तथा शिमला शहर में वर्षा शालिका एवं सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण को धनराशि प्रदान करने को भी मंजूरी दी गई है। उन्होंने कांगड़ा की तर्ज पर पौंग डैम परिसर में किसी भी स्थान पर महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित करने का सुझाव भी दिया।

हि.प्र. पर्यटन बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री विजय सिंह मनकोटिया ने पौंग डैम में पर्यटन गतिविधियों में सुधार के लिए विभिन्न कदम उठाने के सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि पौंग बांध में व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करने के लिए राज्य सरकार के साथ भाखड़ा ब्यास प्रबन्धन बोर्ड से बैठक करने का अनेक बार आग्रह करने के बाबजूद बीबीएमबी  अधिकारी मंद दृष्टिकोण अपना रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस वित्त वर्ष के समाप्त होने से पूर्व बीबीएमबी को स्पष्ट निर्देश जारी करने का आग्रह किया। उन्होंने हवाई अड्डे के  विकास और शिमला के लिए उड़ानों पर चिंता जाहिर की।

कला, भाषा एवं संस्कृति विभाग के सचिव अनुराधा ठाकुर ने शिमला जिला में ब्रिटिशकाल के चूरट एवं गुम्मा में जल धरोहर संग्रहालयों के विकास का सुझाव दिया, जो अभी भी क्रियाशील हैं।

 

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