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योजना आयोग के बन्द होने से हिमाचल को केन्द्र से आर्थिक मदद में कटौती

शिमला: प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने आज यहां कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के समय में योजना आयोग को भंग करने से हिमाचल प्रदेश को आर्थिक रूप से भारी नुकसान सहना पड़ा है। हिमाचल प्रदेश को योजना आयोग से जो धन राशि पूर्व में प्राप्त होती थी, उससे अब प्रदेश वंचित है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2015-16 के बाद सामान्य केन्द्रीय सहायता, विशेष केन्द्रीय सहायता और विशेष योजना सहायता के रूप में प्राप्त होने वाली धन राशि के बन्द होने से सालाना 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। योजना आयोग के बन्द होने के कारण प्रदेश के वित्त पोषण का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत पूरी तरह से समाप्त हो चुका है और प्रदेश को गत दो वर्षों में इससे लगभग 6,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

प्रवक्ता ने कहा कि केन्द्रीय प्रायोजित योजनाओं पिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोष, राष्ट्रीय ई-शासन के बन्द होने तथा त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम व बाढ़ प्रबन्धन कार्यक्रम के तहत बेहद कम आबंटन होने से हिमाचल प्रदेश को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसका असर जिला ऊना, कांगड़ा, मण्डी व हमीरपुर जिलों में कार्यान्वित की जा रही योजनाओं पर मुख्य रूप से हुआ है। साथ ही चम्बा और सिरमौर जिलों में भी पिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोष योजना के समाप्त होने से इन जिलों को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा राज्य को केन्द्रीय करों के हस्तांतरण में कमी के परिणामस्वरूप पिछले दो वर्षों में 1500 करोड़ रुपये की हानि हुई है।

उन्होंने कहा कि केन्द्रीय वित्त पोषण में कमी के कारण वर्ष 2015 से 2020 की 5 वर्ष की अवधि के दौरान प्रदेश को 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान अनुमानित है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि हिमाचल प्रदेश को केन्द्र सरकार के दावों के विपरित वर्तमान में कम धन राशि प्राप्त हो रही है।

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