मुख्यमंत्री ने दिए बोखटू-पूह-काजा-लोसर विद्युत ट्रांसमिशन लाईन को पूरा करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने दिए बोखटू-पूह-काजा-लोसर विद्युत ट्रांसमिशन लाईन को पूरा करने के निर्देश

  • मुध-भावा सड़क के लिये वन स्वीकृति का मामला भारत सरकार से उठाने के निर्देश
  • विद्युत विभाग में फील्ड स्टॉफ के भरे जाएंगे 3000 पद

शिमला : मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बोखटू (कड़छम वांगतू) से काजा-लोसर तक 66 किलोवाट विद्युत ट्रांसमिशन लाईन बिछाने के कार्य में अनावश्यक विलंब पर चिंता जाहिर की है। 66 केवी/22 केवी की ये लाइनें 150 किलोमीटर से अधिक दूरी कवर करते हुए कड़छम से काजा के बीच बिछाई जानी थी, जिससे लाहौल स्पिति तथा किन्नौर जिलों के दूरवर्ती क्षेत्रों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्राप्त होनी थी। राज्य जनजातीय सलाहकार परिषद की आज यहां आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन लाईनों पर विद्युत बोर्ड ने लगभग 50 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च कर ली है, लेकिन ट्रांसमिशन लाईन बिछाने की परियोजना अभी तक अधर में लटकी है। हालांकि, कुछ अन्य प्राकृतिक कारणों सहित मौसमी परिस्थितियों के कारण कार्य करने में कुछ बाधाएं आई हैं, लेकिन, क्योंकि यह परियोजना वर्ष 1997 में आरम्भ की गई थी और इसे अब तक पूरा किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि विभाग को प्राकृतिक अवरोध से निपटने के लिए संभावनाओं को देखते हुए भूमिगत तारें बिछाने पर विचार करना चाहिए था।

हालांकि, इसके उत्तर में यह अवगत करवाया गया कि बोखटू से लाईन को वर्ष 2005 में क्रियाशील बनाया गया था, लेकिन वर्ष 2015 में भारी बर्फबारी के कारण अनेक स्थानों पर तारें तहस-नहस हो गईं थी, जिन्हें क्रियाशील बनाकर जनवरी, 2016 में बिजली आपूर्ति को बहाल किया गया। पूह में 66 केवी विद्युत उप-केन्द्र शीघ्र स्थापित किया जाएगा क्योंकि इसकी सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली गई हैं। जहां तक अकपा से पूह के बीच कार्य का सम्बन्ध है, यहां 110 टावर स्थापित किए जा चुके हैं तथा अब विद्युत आपूर्ति सामान्य है। पूह से काजा के बीच 107 किलोमीटर ट्रांसमिशन लाईन बिछाने का प्रस्ताव है, लेकिन इस क्षेत्र में कुछ भू-स्खलन एवं ग्लेशियर प्वांईट हैं। विभाग का ग्लेशियर तथा भू-स्खलन क्षेत्रों को छोड़कर 206 बिजली के खंबे स्थापित करने का प्रस्ताव है जिसमें चांगों से सुमदो (13 कि.मी.), हुरलिंग से पूह (33 कि.मी.), शिलचिंग से लिंगटी (8 कि.मी.) तथा लिदांग से काजा (12 कि.मी.) ट्रांसमिशन लाईनें भी शमिल हैं। इसका सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है और प्राक्कलन तैयार किया जा रहा है तथा काजा से लोसर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी तैयार है।

वीरभद्र सिंह ने 106 किलोमीटर अतरगु-मुध-भावा सड़क जिससे पिन घाटी के लिए लगभग 100 किलोमीटर की दूरी कम होनी है, पर धीमी गति से चल रहे निर्माण कार्य पर भी चिंता जाहिर की है। काजा की ओर से 33.5 किलोमीटर सड़क का कार्य पूरा हो चुका है तथा 28 किलोमीटर भाग पिन घाटी राष्ट्रीय पार्क वन्य प्राणी अभ्यारण के अन्तर्गत आता है। उन्होंने कहा कि वन स्वीकृति से जुड़ा मामला राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक में उठाया जाएगा। उन्होंने वन विभाग को मामला केन्द्रीय प्राधिकृत समिति से उठाने के निर्देश दिए ताकि सड़क का निर्माण पूरा हो और स्पिति निवासियों को राहत मिल सके।

उरनी ढांक में सुरंग के निर्माण को लेकर भी चर्चा की गई ताकि भारी भू-स्खलन से होने वाले अवरोध की समस्या का स्थायी समाधान हो सके। हाल ही में दो वैकल्पिक पूलों को यातायात के लिए खोला गया है और जहां तक सुरंग का मामला है, एक कंसलटेंट की नियुक्ति की गई है और रिपोर्ट का इंतजार है। किन्नौर जिले में चल रहे लियो बाईपास सड़क के निर्माण को पूरा करने के निर्देश जारी किए गए। सीमावर्ती सड़क होने के कारण इससे ‘का’ तथा ‘चांगों’ गांवों के बीच लगभग 17 किलोमीटर की दूरी कम होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंबा जिले के पांगी उपमंडल में जम्मू एवं कश्मीर की सीमा से लगते केहड़ू नाला से संसारी नाला सड़क का सुधार, पुनः परत बिछाना तथा चौड़ा करने का कार्य व्यवस्थित ढंग से किया जाना चाहिए। वर्तमान में यह सड़क ‘ग्रेफ’ के अधीन है तथा ग्रेफ अधिकारियों के अनुसार सड़क के कुछ किलोमीटर भाग को आउटसोर्स किया गया है तथा ग्रेफ रक्षा मंत्रालय की अनुमति के उपरांत ही इसका कार्य कर सकती है, जिसके लिए मामला भेजा जा रहा है।

वीरभद्र सिंह ने दिए मूलिंग पुल का कार्य जून, 2017 तक पूरा करने के निर्देश

वीरभद्र सिंह ने मूलिंग पुल का कार्य जून, 2017 तक पूरा करने के भी निर्देश दिए। बैठक में जानकारी दी गई की चंद्रा नदी पर रोहतांग सुरंग के उत्तरी पोर्टल को जोड़ने वाले वैलीपुल का निर्माण कार्य एक सप्ताह के भीतर पूरा हो जाएगा। इस पुल का निर्माण वर्ष 2006 में लाहौल एवं स्पिति के सिस्सु के समीप तेलिंग गांव में रोहतांग सुरंग के उत्तरी पोर्टल को सामान की आपूर्ति के लिए किया गया था और यह पुल चंद्रा नदी में तेज बहाव के कारण 29 जुलाई, 2016 को ढह गया था। बैठक में सांगला से दिल्ली डिलक्स बस सेवा आरम्भ करने तथा केलंग, त्रिलोकनाथ व उदयपुर में कुछ अतिरिक्त बसें चलाने का निर्णय लिया गया। यह अवगत करवाया गया कि राज्य के जनजातीय क्षेत्रों में लोगों को सुविधा पहुंचाने के लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम की 22 अतिरिक्त बसें तैनात की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने किन्नौर के निचार में छात्रावास (एकलव्य भवन) का निर्माण कार्य पूरा करने में असफल रहे ठेकेदार के विरूद्ध कार्रवाही करने के निर्देश जारी किए क्योंकि इस भवन का निर्माण कार्य काफी अर्से से लंबित पड़ा है। विद्युत बोर्ड सीमित में रिक्तियों के मामले पर मुख्यमंत्री ने कहा कि फील्ड स्टाफ के 3000 पदों को शीघ्र भरा जाएगा तथा इन्हें जनजातीय तथा अन्य दूरवर्ती क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग का विश्राम गृह रांगवे के बजाए उदयपुर में खोलने का निर्णय भी लिया गया।

वीरभद्र सिंह ने राज्य के जनजातीय क्षेत्रों में कार्य की कम अवधि के चलते लंबित कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश जारी किए। उन्होंने लोगों से जनजातीय सलाहकार समिति की बैठक में केवल कल्याण एवं विकास से जुड़े नीतिगत मामलों को प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में पिछले चार वर्षों में विकास के कार्यों में तेजी लाई गई है तथा शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया गया है। राज्य के जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए वर्ष 2016-17 के लिए योजना के अन्तर्गत 696 करोड़ रुपये तथा गैर योजना के अन्तर्गत 610 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

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