पर्यावरण स्वीकृतियों की शक्तियां राज्य सरकार को प्रदान करने का आग्रह

पर्यावरण स्वीकृतियों की शक्तियां राज्य सरकार को प्रदान करने का आग्रह

शिमला: पर्यावरण स्वीकृतियों के विभिन्न मुद्दों, विशेषकर सभी नदियों पर समस्त जल विद्युत परियोजनाओं के लिए पर्यावरण स्वीकृतियों की शक्तियां राज्य सरकार को प्रदान करने पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अनिल माधव दवे से मुलाकात की और चर्चा की।

केन्द्रीय मंत्री का लम्बित पर्यावरण स्वीकृतियों पर ध्यान आकृष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं जैसे राज्य में सड़कों का निर्माण, जल विद्युत तथा सिंचाई परियोजनाओं के कार्यान्वयन में अनेकों चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने अवगत करवाया कि भारत सरकार द्वारा हस्तांतरण प्रस्तावों पर सहमति न देने के कारण जल विद्युत परियोजनाओं के लगभग 57 मामले, अनेकों खनन परियोजनाएं और यहां तक कि राष्ट्रीय महत्व की रोहतांग सुरंग परियोजना भी प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में राज्य सरकार के प्रयासों तथा पूर्ण प्रमाणिकता के बावजूद गत वर्ष से वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अन्तर्गत कोई भी वन स्वीकृति प्रदान नहीं की गई है।

जल विद्युत परियोजनाओं के लिए पर्यावरण स्वीकृति प्रदान करने की शक्तियां प्रदत्त करने के मामले को प्रभावी ढंग से उठाते हुए वीरभद्र सिंह ने चिंता जताते हुए कहा कि राज्य में व्यापक जल विद्युत क्षमता मौजूद होने के बावजूद पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से पर्यावरण स्वीकृति में देरी के कारण यहां तक कि रन-आफ-द-रिवर जल विद्युत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भी अनावश्यक देरी हो रही है। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से आग्रह किया कि जल विद्युत परियोजनाओं के लिए पर्यावरण स्वीकृतियों की शक्तियां राज्य सरकार को प्रदान करने की नितांत आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने अवगत करवाया कि वर्तमान में 50 मैगावाट से कम क्षमता वाली जल विद्युत परियोजनाओं को प्रदेश सरकार द्वारा स्वीकृति प्रदान की जा सकती है, जबकि 50 मैगावाट क्षमता से अधिक की परियोजनाओं के लिए पर्यावरण स्वीकृतियां प्रदान करने की शक्तियां केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को हैं। उन्होंने कहा कि राज्य को शक्तियां प्रदान करने के लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 को लागू करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि अधिनियम के जिन प्रावधानों के अन्तर्गत राज्य सरकार को 50 मैगावाट से कम क्षमता वाली परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी की शक्तियां प्रदान की गई हैं, उन्हीं के अन्तर्गत ही समस्त रन-आॅफ-द-रिवर जल विद्युत परियोजनाओं की पर्यावरण स्वीकृति प्रदान करने की शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अनिल माधव दवे ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि पहाड़ी राज्य के लोगों की विकास की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण एवं स्वच्छ उर्जा जैसे मुद्दे वर्तमान एनडीए सरकार के एजेंडे में सबसे ऊपर हैं और मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि केन्द्र सरकार राज्य में उपलब्ध व्यापक जल विद्युत क्षमता के दोहन में एक भागीदार के रूप में कार्य करना चाहती है।

वीरभद्र सिंह ने वन भूमि को गैर वानिकी कार्यों के लिए परिवर्तन करने का मामला भी उठाया तथा केन्द्रीय मंत्री से आग्रह किया कि राज्य सरकार के ठोस प्रयासों के कारण राज्य के वन आवरण में सकारात्मक परिवर्तन के दृष्टिगत प्रदेश में मौजूदा एक हेक्टेयर भूमि के परिवर्तन की शक्तियों को 10 हेक्टेयर तक बढ़ाने के राज्य सरकार के आग्रह को स्वीकार किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राष्ट्रीय वन नीति के दिशा-निर्देशानुसार वन आवरण बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इन शक्तियों के बढ़ने से हिमाचल प्रदेश के लोगों की विकासात्मक आवश्कताएं पूरी करने में मद्द मिलेगी।

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