नशीली दवाओं के विक्रेताओं पर नियंत्रण के लिए अधिनियम में आवश्यक संशोधन करना जरूरी : सीएम

शिमला: ड्रग्स एंव कॉसमेटिक्स अधिनियम, 1940 विशेषकर अधिनियम की धारा 18 तथा इसके उप भागों में आवश्यक संशोधनों के मामलों पर विचार करने के लिए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने गृह सचिव को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं, ताकि इसे संज्ञेय तथा गैर जमानती अपराध की श्रेणी में लाया जा सके।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, विधायक पवन काजल, योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष जी.आर. मुसाफिर, , संसाधन एवं रोजगार सृजन के अध्यक्ष हर्षवर्द्धन चौहान ने भी इस अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि ड्रग माफिया पर लगाम कसने तथा सिंथेटिक दवाओं के व्यापार में संलिप्त नशीली दवाओं के विक्रेताओं पर नियंत्रण के लिए अधिनियम में आवश्यक संशोधन करना जरूरी हो गया है।

राज्य वन निगम के उपाध्यक्ष केवल सिंह पठानिया ने आज यहां यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि प्रायः देखा गया है कि लोग जो सिंथेटिक नशीले पदार्थों की अवैध खरीद व फरोख्त में पकड़े गए दोषी मौजूदा ड्रग्स एवं कॉसमेटिक्स अधिनियम में कड़े प्रावधान न होने के कारण बरी हो जाते हैं।

मुख्यमंत्री के साथ मामले पर चर्चा करते हुए केवल सिंह पठानिया ने कहा कि दवा निरीक्षक की उपस्थिति के बगैर पुलिस नशे के व्यापार में संलिप्त दवाइयों की दुकानों की छापामारी नहीं कर सकती। छापामारी के दौरान दवा निरीक्षक की अनुपस्थिति में दोषी दवाई विक्रेता कानून के पंजे से बच जाते हैं।

उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिले के शाहपुर में 1500 युवाओं की एक ‘व्यसन मुक्त युवा’ (ए.एफ.वाई) संस्था बनाई गई है, जो लोगों को नशीले पदार्थों के कुप्रभावों के बारे में जागरूक कर रही है तथा नशे का अवैध कारोबारियों पर शिकंजा कसने में सहयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि शाहपुर की सभी 54 पंचायतों में एक अभियान चलाया गया है और अब तक इसके अन्तर्गत सात पंचायतों को कवर किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि कुछ दवा विक्रेताओं द्वारा स्कूली बच्चों और यहां तक की कॉलेज के विद्यार्थियों को प्रलोभन देकर उन्हे नशीले पदार्थ उपलब्ध करवाने को लेकर लोगों में गुस्सा बढ़ रहा था। उन्होंने कहा कि दवा विक्रेताओं पर कड़े नियंत्रण के अभाव में बाजार में प्रॉक्सीवोन प्लस, प्रॉक्सीवोन स्पास, कोडिन फासफेट तथा इस प्रकार की अन्य दवाइयां आसानी से उपलब्ध हो रही हैं और दवा विक्रेता इस अवैध धंधे में संलिप्त हैं।

उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिले में एक व्यापक अभियान चलाया गया है और समाज से इस बुराई को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए कुछ और युवा संगठनों का गठन किया जाएगा।

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