बरसात में स्वास्थ्य को लेकर बरतें खास सावधानी : डॉ. प्रेम मच्छान

बरसात में स्वास्थ्य को लेकर बरतें खास सावधानी : डॉ. प्रेम मच्छान

  • बरसात में गंदे पानी और खाद्य पदार्थों से कई बीमारियों के होने खतरा
बरसात में स्वास्थ्य को लेकर बरतें खास सावधानी : डॉ. प्रेम मच्छान

बरसात में स्वास्थ्य को लेकर बरतें खास सावधानी : डॉ. प्रेम मच्छान

आजकल बरसात का मौसम है तो ऐसे में कई प्रकार की बीमारियों के होने का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहना बहुत जरूरी है। बारिश के मौसम में अक्सर हम लोग गंदे हाथों से कुछ भी खा लेते हैं जिस वजह से वे कई प्रकार की बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता हैं। इस मौसम में गंदे पानी और खाद्य पदार्थों से भी कई बीमारियों के होने खतरा बढ़ जाता हैं जैसे दस्त, हैजा, टाइफाइड, और फूडपाइजनिंग आदि। बरसात के मौसम में पानी के साथ-साथ हवा भी दूषित हो जाती है जो सीधे जीवाणु के रूप में आपके अंदर जाकर फ्लू, जुकाम और ब्रोंकाइटिज जैसे रोग उत्पन्न करती है। इसी के चलते हुए इस बार हम आपको बरसात में स्वास्थ्य को लेकर किस प्रकार की सावधानी बरतनी आवश्यक है के विषय के बारे में विस्तार से जानकारी देने जा रहे हैं। प्रस्तुत हैं आईजीएमसी अस्पताल चिकित्सालय के मेडिसन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रेम मच्छान से मीना कौंडल की बातचीत के महत्वपूर्ण अंश :

  • बरसात के मौसम किस प्रकार के रोग और समस्याएं होने की संभावना बढ़ जाती है?

बरसात अपने साथ कई तरह के रोग और समस्याएं भी लेकर आती हैं। इस मौसम में पेट के अलावा स्किन और जुकाम, बुखार जैसी समस्याएं होना आम बात है। बरसात के मौसम में प्रदूषित व संक्रमित पानी पीने से हैजा, उल्टी व दस्त जैसी बीमारियों का खतरा रहता है। दस्त में पेट दर्द, और बुखार के साथ आंतो में सूजन जैसे लक्षण होते हैं। साथ ही पानी के प्रदूषित होने से त्वचा में चिपचिपाहट होने के साथ एलर्जी का होना, त्वचा संबंधी रोग, टाइफायड बुखार, मच्छरों से होने वाली बीमारियों का भी डर रहता है। बरसात के समय में मच्छर पनपने लगते हैं जिस वजह से डेंगू , मलेरिया और चिकुनगुनिया जैसे गंभीर रोग होते हैं। बदलते मौसम में मच्छरों की वजह से डेंगू की बीमारी अक्सर लोगों को होने लगती है। यह एक तरह का बुखार होता है जो डेंगू के मच्छर के काटने से होता है। इस रोग के मुख्य लक्षण सिर दर्द, बुखार, आंखों में दर्द, बदन में दर्द और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण होते हैं। इस रोग से बचने के लिए अपने घर के आस-पास गंदा पानी को जमा न होने दें। रात को सोते समय मच्छरदानी लगाकर सोएं। सबसे ज्यादा जरूरी है वो ये कि पानी हमेशा उबाल कर पीएं।

  • क्या बरसात में आंखों के रोग होने की आशंका भी होती है?

बरसात की वजह से आंखों में भी कई प्रकार के रोग लगने लगते हैं जैसे आई फलू यानि आंख आना आदि। जिस वजह से आंख लाल हो जाती है और सूजन की वजह से आंखों में दर्द भी होने लगता है। फलू से बचने के लिए साफ हाथों से ही आंखों को साफ करना चाहिए। अपने खुद के तौलिये से ही शरीर को पोछें। आंखों को दिन में 3 से 4 बार पानी से धोना चाहिए। यदि तब भी आंखों की ये बीमारी दूर न हो रही हो तो आँखों के विशेषज्ञ को तुरंत दिखाएं।

  • फूड प्वाइजनिंग यानी खाने संबंधी बीमारियों के होने के कारण व लक्षण क्या हैं, इसके क्या उपचार हैं ?

फूड प्वाइजनिंग संक्रमित भोजन करने से होता है। इस रोग में पेट में दर्द, उल्टी, बुखार आना व ठंड लगना आदि मुख्य लक्षण होते हैं। ऐसे में ग्लूकोज का पानी, शिकंजी, सूप, और पानी आदि का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। इस बीमारी से बचने के लिए साफ सुथरा खाना ही खाएं। साफ बर्तन में ही भोजन रखकर सेवन करें। डॉ. से सही विचार-विमर्श लें।

  • बरसात में पेट की बीमारी कितनी बढ़ जाती है?

बरसात में दूषित खाने और पानी के इस्तेमाल से पेट में इन्फेक्शन यानी गैस्ट्रोइंटराइटिस हो जाता है। ऐसा होने पर मरीज

 बरसात में गंदे पानी और खाद्य पदार्थों से कई बीमारियों के होने खतरा

बरसात में गंदे पानी और खाद्य पदार्थों से कई बीमारियों के होने खतरा

को बार-बार उलटी, दस्त, पेट दर्द, शरीर में दर्द या बुखार हो सकता है।

  • डायरिया क्या है? कारण , लक्षण व उपचार क्या हैं?

डायरिया को आम बोलचाल की भाषा में लूज मोशन या दस्त भी कहा जाता है। डायरिया अपने आप में कोई रोग नहीं है, लेकिन यह कई रोगों की वजह बन सकता है। लोगों में गलत धारणा है कि डायरिया के मरीज को खाना-पानी नहीं देना चाहिए। यह खतरनाक है। मरीज को सिर्फ तली-भुनी चीजों से परहेज करना चाहिए। बाकी ताजा चीजों का इस्तेमाल बंद नहीं करना चाहिए।

दूषित खाना और पानी पीने से तमाम तरह के बैक्टीरिया हमारे शरीर के अंदर पहुंच जाते हैं, जिनकी वजह से डायरिया हो जाता है। बार-बार उल्टी-दस्त, पूरे शरीर में दर्द, कमजोरी व आलस्य, बुखार व सिर में दर्द होना डायरिया के प्रमुख लक्षण हैं। दस्त लगने की समस्या अक्सर बरसात के मौसम में हो जाती है। ये दूषित खाने पीने के सामान या गंदा पानी पीने से होता है। इस मौसम में ई कोलाई, साल्मोनेला, रोटा वायरस, नोरा वायरस का संक्रमण बढ़ जाता है। जिसके कारण पेट व आँतों में सूजन और जलन होकर उल्टी दस्त आदि की शिकायत हो जाती है। साधारण रूप से दस्त 4-5 दिन में ठीक हो जाते है।

  • छोटे बच्चे में डायरिया की समस्या ज्यादा रहती है क्यों?

छोटे दूध पीते बच्चे को दूध की बोतल की सफाई सही तरीके से ना होने के कारण दस्त हो सकते है। पानी हमेशा उबला हुआ ही पीना चहिये। दस्त की समस्याओं से बचने के लिए खाने पीने की चीजों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। विशेष कर बाहर पीने का पानी, चाट, गोल गप्पे, पानी पूरी, भेल पूरी, खुले में बिकने वाली मिठाइयां आदि दस्त की समस्या पैदा करने की वजह होते है। अतः इनके सबंध में सावधानी रखनी चाहिए। कटे हुए फल व सलाद आदि ज्यादा देर तक ना रखें। खाना खाने से पहले अपने हाथों को साबुन से धो लेना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा बाहर के खाने- पीने से परहेज करना चहिए।

डायरिया ग्रस्त व्यक्ति को उबला आलू, चावल का मांड, नींबू की शिकंजी, पका केला आदि आसानी से पचने वाले आहार थोड़ी मात्रा में लेने चाहिए। पानी में नमक, चीनी का घोल बनाकर थोड़ा-थोड़ा लगातार देते रहना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी ना हो। और तुरंत डॉक्टर को दिखाना चहिए।

  • बरसात के मौसम में किस प्रकार की सावधानियां व बचाव बरतने की आवश्यकता रहती है?

बारिश में बार-बार भीगने से बचें। बारिश में भीग जाने पर गीले कपड़े ज्यादा देर नहीं पहन कर रखने चहिए। सूखे कपड़े पहने। खुले, हल्के और हवादार कपड़े पहनें। किसी व्यक्ति को जिसे सर्दी हो, अगर आप उसके संपर्क में आये हो तो हाथ ज़रूर धोएं। खट्टे फलों का सेवन करे जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली बेहतर होती है। कमरों को सूखा और स्वच्छ रखें। गरम पानी पिएं और पानी जब भी पीना हो तो उबला हुआ पानी पीएं। मच्छरों से बचने के लिए कोइल, नेट इत्यादि उपयोग में लाएं। कपड़े धोते हुए उनमें साबुन न रहने पाए। ऐंटिबैक्टीरियल साबुन जैसे कि मेडसोप, सेट्रिलैक (Cetrilak) आदि से दिन में दो बार नहाएं। शरीर को जितना मुमकिन हो, सूखा और फ्रेश रखें। – पैरों और हाथों की उंगलियों में मॉइस्चर न रहें। लगाने वाली दवा भी कम लगाएं। उससे गीलापन बढ़ता है। उससे बेहतर पाउडर लगाना है। पानी खूब पिएं। इससे शरीर में गर्मी कम रहेगी। पेट साफ रखें। कब्ज न होने दें, वरना शरीर गर्म रहेगा। डायबीटीज के मरीज शुगर को कंट्रोल में रखें। फुटवेयर साफ रखें। सफाई का पूरा ध्यान रखें। खाने से पहले साबुन से हाथ धोएं। बाहर का कुछ भी खाते समय एहतियात बरतें, जहां तो हो सके बाहर के खाने बचें। खाने की चीजों को अच्छी तरह से पकाएं व ढककर रखें। फ्रूट जूस बाहर का न पीएं। साफ़ सब्जियों का सेवन करें,:पत्तियों वाली सब्जी को ठीक से धोएं।

  • क्या इस मौसम में त्वचा की बीमारियों के होने का खतरा भी बना रहता है? इसके लिए किस प्रकार की सावधानी बरतने की आवश्यकता रहती है?

बारिश के मौसम में त्वचा की समस्याएं सबसे ज्यादा होती हैं। फंगल व बैक्टीरियल इंफेक्शन, घमौरियां, रैशेज और शरीर

पाचन क्रिया को दुरुस्त रख कर यह पेट की कई बीमारियों को दूर रखने में कारगर होता हैसाबित

पाचन क्रिया को दुरुस्त रख कर यह पेट की कई बीमारियों को दूर रखने में कारगर होता है साबित

पर दाने निकलने जैसी दिक्कतें आम होती हैं। इस मौसम में शरीर से पसीना ज्यादा निकलता है। उमस ज्यादा होने के कारण बैक्टीरिया और वायरस तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में सफाई का ध्यान न रखने से समस्या बढ़ जाती हैं। इसके लिए सावधानी जैसे कॉटन के हल्के कपड़े पहनें, जो पसीना सोखें। बारिश में भीगकर आने के बाद साबुन से जरूर नहाएं। पैरो की उंगलियों के बीच की सफाई पर खास ध्यान दें।-खाने में खीरा और नींबू जैसी चीजों और हरी सब्जियों का इस्तेमाल ज्यादा करें। खूब पानी पिएं और तली-भुनी, बासी या बाहर की चीजें खाने से बचें। स्किन विशेषज्ञ से त्वचा की समस्याएं को लेकर जरुर संपर्क करें। पौष्टिक और उचित आहार स्वास्थ्य सम्बधी समस्याओ और मौसमी बीमारियों से बचाता है जबकि विषाक्त भोज हमे अपच ,दस्त , पेचिश ,हैजा ,खासी-जुकाम वायरल जैसी बीमारियों की चपेट में लाता है। अपनी दिनचर्या में फलो को तरजीह दें। इनमे मौजूद पौष्टिक और एंटीओक्सिडेंट तत्व ना केवल शरीर में उर्जा संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि शरीर से विषाक्त पदार्थो को बाहर निकालते है और संक्रमन से बचाव कर हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं।

पाचन क्रिया को दुरुस्त रख कर यह पेट की कई बीमारियों को दूर रखने में कारगर साबित होता है। सर्दी , बुखार और सांस सम्बधी कई संक्रमन विषाणुओं द्वारा व्यक्ति से व्यक्ति में फैलते रहते हैं। अगर आप सर्दी खासी से पीड़ित है तो खांसते छीकते वक्त अपने मुह और नाक को ढंके और वह टिशु या कपड़ा फेंक दे। भोजन और पेय सम्बधी उपयोग का पानी अच्छी तरह से उबालें। खाने को अच्छा पकाएं। फल और सब्जियों का सेवन ज्यादा करें।

 

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