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पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधियों की शक्तियों में राज्य सरकार द्वारा कोई कटौती नहीः अनिल शर्मा

शिमला: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मन्त्री अनिल शर्मा ने आज यहां कहा कि राज्य सरकार पंचायती राज संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण एवं सर्वांगीण विकास के लिये प्रतिबद्व है, और इसके लिये निचले स्तर पर शक्तियों का विकेन्द्रीकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के कुछ नेता यह दावा कर रहे हैं कि पंचायती राज संस्थानों की शक्तियों को कम किया गया है, जो कि राजनीति से प्रेरित है एवं तथ्यों पर आधारित नहीं है।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मन्त्री ने कहा कि 14वें वित्तायोग की सिफारिशों के अनुसार धनराशि सीधे पंचायतों को प्रदान की जा रही है, और आयोग की सिफारिशों में अन्य दो स्तरों अर्थात जिला पंचायत तथा पंचायत समिति को धनराशि प्रदान करने का प्रावधान नहीं है। सिफारिशों में स्पष्ट किया गया है कि धनराशि केवल ग्राम पंचायत को ही प्रदान की जाएगी। ग्राम पंचायतें इस राशि का उपयोग निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप पंचायत क्षेत्र में मूलभूत नागरिक सेवाओं को प्रदान करने हेतु व्यय करेगी जिसके लिए प्रत्येक पंचायत को वार्षिक योजना तैयार करनी होगी।

उन्होंने कहा कि 14वें वित्तायोग की इन सिफारिशों को वर्तमान केन्द्र सरकार ने ही स्वीकृत किया है, जिनमें जिला परिषद तथा पंचायत समितियों को धनराशि से वंचित किया गया है। जबसे ये सिफारिशें राज्य सरकार को प्राप्त हुई है उसी समय से राज्य सरकार केन्द्र सरकार को इनमें संशोधन करने हेतु आग्रह कर रही है ताकि 14वें वित्तायोग की राशि में से कुछ हिस्सा जिला परिषदों तथा पंचायत समितियों को भी प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के बार-बार आग्रह के बावजूद केन्द्र सरकार ने इस दिशा में कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि मुख्य मन्त्री की ओर से यह मामला प्रधान मन्त्री से भी उठाया गया है, लेकिन एक मास से अधिक का समय व्यतीत होने पर भी कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है।

अनिल शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्य मन्त्री प्रेम कुमार धूमल का यह ब्यान भी निराधार है कि 14वें वित्तायोग की धनराशि को व्यय करने के लिए खण्ड स्तर पर अधिकारियों की समिति गठित की गई है, जबकि वास्तविकता यह है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत अपने स्तर पर इस धनराशि को व्यय करने के लिए वार्षिक तथा पंचवर्षीय योजनाएं तैयार करेगी, जिन्हें ग्राम सभा द्वारा अनुमोदित कर सम्बन्धित विकास खण्ड स्वीकृति हेतु भेजा जाएगा। विकास खण्ड स्तर पर विकास खण्ड की सभी पंचायतों की योजनाओं को समेकित करके जिला को भेजा जाएगा और जिला स्तर पर जिला योजना समिति द्वारा इसे अनुमोदित किया जाएगा। अनुमोदन के बाद योजना का पूर्ण कार्यान्वयन ग्राम पंचायत द्वारा किया जाएगा और धनराशि पहले ही सीधे ग्राम पंचायतों को प्रदान की गई है। इस प्रकार योजना को तैयार करने तथा कार्यान्वयन करने में ग्राम पंचायत पूर्णतयः सक्षम है, और किसी भी स्तर पर कोई भी अधिकारी इसमें परिवर्तन करने हेतु प्राधिकृत नहीं है। यदि ग्राम सभा द्वारा वार्षिक योजना में ऐसे कार्यों को शामिल किया गया है जो योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्वीकार्य नहीं है उनके बदले नए कार्यों को शामिल करने का अधिकार भी ग्राम सभा को ही है। इस प्रकार यह आरोप निराधार है कि 14वें वित्तायोग की धनराशि को खर्च करने के लिए खण्ड स्तर पर अधिकारियों की समिति बनाई गई है। इस प्रकार की समिति बनाने के लिए न तो विभाग द्वारा केाई पत्र जारी किया गया है और न ही कोई दिशा निर्देश।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मन्त्री ने कहा कि पूर्व मुख्य मन्त्री का यह ब्यान भी बिल्कुल निराधार है कि उनकी सरकार द्वारा जिला परिषदों तथा पंचायत समितियों को विकास कार्यों हेतु धनराशि प्रदान की गई थी। 12वें तथा 13वें वित्तायोग के तहत जो धनराशि पंचायत समिति और जिला परिषद को प्रदान की गई थी वह उक्त वित्तायोगों की सिफारिशों के मध्यनजर ही प्रदान की गई है अर्थात केन्द्र सरकार द्वारा उक्त वित्तायोगों की सिफारिशों के दृष्टिगत प्रदेश सरकार को प्रदान की गई थी इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा पूर्व में जिला परिषदों तथा पंचायत समितियों को राज्य निधि से विकासात्मक कार्यों हेतु 1995 से लेकर अब तक कोई भी धनराशि पंचायत समितियों और जिला परिषदों के माध्यम से प्रदान नहीं की गई। राज्य वित्तायोग पंचायती राज के तीनों स्तरों को केवल वचनवद्व दायित्व हेतु अनुदान प्रदान करती है।

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