रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाकर अनुराग ने दिखाया दम: प्रो. धूमल

डी.पी.आर.के अभाव में जो पैसा प्रदेश को मिलना था वह प्रदेश सरकार ला पाने में नाकाम : प्रो.धूमल

शिमला: नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि आई.आई.टी. मण्डी का कार्य वर्ष 2008 में शुरू हुआ था और उस समय इसका प्रस्तावित बजट 760 करोड़ रू. था, परन्तु यूपीए सरकार द्वारा बजट का सही आंकलन नहीं होने की वजह से आई.आई.टी. मण्डी के विस्तारीकरण की योजनाओ में धन की भारी कमी आड़े आ रही थी जिसकी वजह से संस्थान के निर्माण कार्य रूके हुए थे। मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के हिमाचल दौरे के दौरान उन्हें इस बात से अवगत करवाया गया था जिस पर उन्होनें इस समस्या के निराकरण के लिए यथासंभव प्रयत्न करने का भरोसा दिया था।

प्रो. धूमल ने कहा कि आज मानव संसाधन विकास मंत्री ईरानी ने दूरभाष के माध्यम से उन्हें स्वयं अवगत करवाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने सारे मामले का संज्ञान लेते हुए आई.आई.टी. मण्डी को विशेष शिक्षण संस्थान व राष्ट्रीय स्तर का दर्जा देते हुए मण्डी आई.आई.टी. का बजट 760 करोड़ रू. से बढ़ाकर 1466 करोड़ रू. कर दिया है और यह बजट पूर्व की तुलना में लगभग दो गुना है। इससे आने वाले समय में यह संस्थान राष्ट्र के प्रमुख आई.आई.टी. में शामिल हो जाएगा। प्रदेश के प्रति इस विशेष उपहार के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी बधाई की पात्र हैं और प्रदेश की जनता उन्हें हृदय से धन्यवाद व्यक्त करती है।

प्रो. धूमल ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस नेता हमेशा यह इलजाम लगाते रहे हैं कि एन.डी.ए. सरकार धन देने में कोताही बरत रही है जबकि वास्तविकता यह है कि एन.डी.ए. सरकार के इन दो वर्षों में प्रदेश के विकास के लिए जो आर्थिक सहयोग मिल रहा है वह अभूतपूर्व है। इसके बावजूद, गलत आरोप लगाना अहसान फरामोशी है। आज कमी केन्द्र सरकार की नहीं बल्कि प्रदेश सरकार की है जो अपने निकम्मेपन की वजह से अधिक से अधिक योजनाओं की डी.पी.आर. समय पर केन्द्र को नहीं भेज पा रही है और डी.पी.आर. के अभाव में जो पैसा प्रदेश को मिलना चाहिए था वह प्रदेश सरकार ला पाने में नाकाम साबित हो रही है। अपनी इस नाकामी के लिए प्रदेश सरकार को प्रदेश की जनता से माफी मांगनी चाहिए और प्रदेश के विकास के लिए तत्परता से कार्य करना चाहिए।

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