हिमाचल में शुरू होगा RAS तकनीक के उपयोग से भूमि आधारित मछली पालन

सचिव, डीएडीएफ ने लिया पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में मछली पालन के लिए राष्‍ट्रीय कार्य योजना 2020 की तैयारियों का जायजा

नई दिल्ली: कृषि मंत्रालय में पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग (डीएडीएफ) में सचिव देवेन्द्र चौधरी ने कल पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के राज्‍यों में मछली पालन के लिए राष्‍ट्रीय कार्य योजना 2020 की तैयारियों का जायजा लिया। इस बैठक में असम, मिजोरम, सिक्किम, त्रिपुरा और मणिपुर ने भाग लिया और राष्ट्रीय कार्य योजना को अंतिम रूप देने के लिए अपने राज्यों के संबंध में आवश्यक जानकारी प्रदान की। प्रत्येक राज्य की आवश्यकताओं का संज्ञान लेते हुए सचिव, डीएडीएफ ने प्रत्‍येक राज्य की अनूठी आवश्यकताओं के आधार पर निर्देश जारी किए। सिक्किम राज्य से ठंडे पानी की मछलियों ,विशेषकर ट्राउट के पालन पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया और मणिपुर तथा असम राज्यों को दलदली भूमि के विकास निवेश करने का निर्देश दिया गया।

इसके अलावा, मिजोरम राज्य को 4300 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले उसके अकेले जलाशय के लिए केज कल्‍चर टैक्‍नॉलोजी अपनाने को कहा गया। ऐसी आशा व्‍यक्‍त की गयी है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों पर विशेष ध्यान देने से ताजा पानी वाली मछली से संबंधित मत्‍स्‍य पालन पर व्‍यापक असर पड़ेगा और समय साथ मछली के आयात पर उनकी निर्भरता कम हो जाएगी। इन पूर्वोत्तर राज्यों के लिए मछुआरों के मकानों का निर्माण करने और बचत-सह राहत योजना में योगदान देने की दिशा में 4.00 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित किए जाने का प्रस्ताव किया गया है। तालाबों और टैंकों में मछली पालन के विकास, जलाशयों में बीज भंडारण और संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर दलदली भूमि के विकास के लिए 41.00 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गयी है। इसी तरह, सिक्किम में ठंडे पानी वाली मछली से संबंधित मत्‍स्‍य पालन के विकास के लिए 4.65 करोड़ रुपये की राशि का प्रस्ताव किया गया।

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