“मुख्यमंत्री किसान एवं खेतीहर मजद़ूर जीवन सुरक्षा योजना’’ का लाभ उठाएं किसान

“मुख्यमन्त्री किसान एवं खेतीहर मजद़ूर जीवन सुरक्षा योजना” शुरू

  • कृषि मशीनरी के प्रयोग के दौरान किसानों व खेतीहर मज़दूरों के घायल या मृत्यु होने में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा योजना शुरू
  • मृत्यु होने पर मुआवज़े के रूप में रू. 1.5 लाख व स्थाई रूप से अपंग होने पर प्रभावित को रू. 50,000 की सहायता की जाएगी प्रदान
  • कृषि मशीनरी को खेत से घर और घर से खेत ले जाते हुए, किसी दुर्घटना की वजह से घायल हुए हों या मृत्यु हुई हो को मिलेगा मुआवज़ा
  • किसी भी उर्जा संचालित मशीनरी का उपयोग, स्थापित या ढुलाई करते समय लगने वाले बिजली के करंट से होने वाली मृत्यु अथवा विकलांगता भी योजना में शामिल
  • योजना में केवल स्थानीय किसान व खेतीहर मजदूर ही शामिल, किसी भी कंपनी/ ठेकेदार के कार्यकर्ता/ कर्मचारी इस योजना में शामिल नहीं
  • योजना को कृषि विभाग द्वारा किया जा रहा है क्रियान्वित
  • दावे की राशि सभी तरह से पूर्ण आवेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर की जायेगी वितरित
  • कृषि निदेशक का किसानों से आग्रह, सुरक्षित होकर खेत में काम करें और दुर्घटना होने पर विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता का लाभ उठायें
कृषि निदेशक डॉ. एस.आर. कालिया

कृषि निदेशक डॉ. एस.आर. कालिया

शिमला: प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के कल्याण के लिए गत वर्ष से आरम्भ की गई मुख्यमंत्री “किसान एवं खेतीहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना” इस वर्ष भी लागू रहेगी। इस योजना की जानकारी देते हुए कृषि निदेशक डा. एस. आर. कालिया ने कहा की कृषि मशीनरी के प्रयोग के दौरान किसानों तथा खेतीहर मज़दूरों के घायल होने अथवा उनकी मृत्यु होने की सूरत में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार ने यह योजना आरम्भ की है। इसमें मृत्यु होने पर मुआवज़े के रूप में रू. 1.5 लाख तथा स्थाई रूप से अपंग होने पर प्रभावित को रू. 50,000 तक की सहायता प्रदान की जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस योजना में उन किसानों तथा खेतीहर मजदूरों को मुआवज़ा मिलेगा जिनकी आयु 14 वर्ष से अधिक हो और जो कृषि मशीनरीए औजार व् उपकरण आदि दारा खेत में प्रयोग के दौरान अथवा कृषि मशीनरी को खेत से घर और घर से खेत ले जाते हुए किसी दुर्घटना की वजह से घायल हुए हों या मृत्यु हुई हो, जबकि इसमें उन किसानों तथा खेतीहर मजदूरों को भी शामिल किया जायेगा जिनकी मृत्यु अथवा विकलांगता नलकूप, बोरवेल, पम्पिंग सेट लघु लिफ्ट इत्यादि को स्थापित या संचालित करते समय हुई हो। किसी भी उर्जा संचालित मशीनरी को उपयोग, स्थापित या ढुलाई करते समय लगने वाले बिजली के करंट से होने वाली किसानों तथा खेतीहर मजदूरों की मृत्यु अथवा विकलांगता को भी इस योजना में शामिल किया जायेगा। इसके अंतर्गत आने वाली कृषि मशीनरी में विभाग में पंजीकृत ट्रैक्टर, पावर टिलर, वीडर, उर्जा चलित हल, रीपर व बाईडर मशीन, पावर थ्रैशर, घास काटने की मशीन, औजार, उपकरण, नलकूप, बोरवेल, पम्पिंग सेट लघु लिफ्ट इत्यादि स्थापित या संचालित करने के लिए उपयोग किये गए उपकरण हैं। इस योजना में केवल स्थानीय किसान तथा खेतीहर मजदूर ही आते हैं और किसी भी कंपनी / ठेकेदार के कार्यकर्ता / कर्मचारी को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है।

कृषि मशीनरी के प्रयोग के दौरान किसानों व खेतीहर मज़दूरों के घायल या मृत्यु होने में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा योजना शुरू

कृषि मशीनरी के प्रयोग के दौरान किसानों व खेतीहर मज़दूरों के घायल या मृत्यु होने में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा योजना शुरू

उन्होंने जानकारी देते कहा कि इस योजना को कृषि विभाग द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। मृतक के कानूनी वारिस या दुर्घटनाग्रस्त को इस तिथि से 2 महीने के भीतर संबंधित ब्लॉक के विषय विशेषज्ञ को दावे के लिए आवेदन जमा करवाना होगा। हालांकि, वास्तविक कारणों के आधार पर 4 महीने तक कृषि निदेशक को और 6 महीने तक सचिव (कृषि) को देरी से आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है। दावे की राशि सभी तरह से पूर्ण आवेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर वितरित कर दी जायेगी।

उन्होंने किसानों से आग्रह किया की वह सुरक्षित होकर खेत में काम करें और दुर्घटना होने पर विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता का लाभ उठायें।

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