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प्रदेश सरकार दे रही है कमजोर वर्गों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता

  • कमजोर वर्गों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिये अनेक योजनाएं कार्यान्वित

फ़ीचर

प्रदेश सरकार ने समाज के सभी वर्गों विशेषकर आर्थिक व सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की है। इन वर्गों को मुख्यधारा में शामिल करने तथा सामाजिक एवं आर्थिक रूप से स्वावलम्बी बनाने के लिये वर्तमान राज्य सरकार ने अनेक कार्यक्रम एवं योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। अनुसूचित क्षेत्रों का समग्र विकास तथा जन जातीय लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से जन जातीय उप-योजना आरम्भ की गई है जिसके लिये वर्ष 2016-17 में 468 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, गद्दी, गोरखा, गुजर, लबाणा अनुचित जाति कल्याण बोर्ड, अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण बोर्ड, अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड, कबीरपंथी कल्याण बोर्ड, विश्वकर्मी समाज कल्याण बोर्ड, रविदास कल्याण बोर्ड, कोली कल्याण बोर्ड व बाल्मिकी कल्याण बोर्ड का गठन किया गया है ताकि इन वर्गों के कल्याण के लिये आरम्भ की गई योजनाओं एवं कार्यक्रमों का बेहतर कार्यान्वयन सुनिश्चित बनाया जा सके।

 

  • सामाजिक सुरक्षा पेंशन 650 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक

बृद्धजनों, विधवाओं तथा शारीरिक रुप से अक्षम व्यक्तियों को आर्थिक तौर पर सम्बलता प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा योजना को प्रभावी ढंग से कार्यान्वित किया जा रहा है। योजना के अन्तर्गत गत तीन वर्षों में सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 450 रुपये मासिक से बढ़ाकर 650 रुपये प्रति माह किया गया है। 70 प्रतिशत से अधिक विकलांगता वाले व्यक्तियों व 80 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के व्यक्ति जो अन्य कोई पेंशन प्राप्त नहीं कर रहे हैं, की मासिक पेंशन को 800 रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये किया गया है।

45 वर्ष से कम आयु की विधवा माताओं की मासिक पेंशन को 600 रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये प्रतिमाह

45 वर्ष से कम आयु की विधवा माताओं की मासिक पेंशन को 600 रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये प्रतिमाह किया गया है। गत तीन वर्षों के दौरान वर्तमान प्रदेश सरकार ने 57 हजार नये सामाजिक सुरक्षा पेंशन के माममले स्वीकृत किये हैं तथा वर्ष 2016 में 24000 नये पेंशन मामलों को स्वीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है।

सामाजिक सुरक्षा पेंशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता एवं कार्यकुशलता सुनिश्चित बनाने के उद्देश्य से इस वर्ष से आधार नम्बर आधारित डाकखाना खाता योजना आरम्भ करने का निर्णय लिया गया है। योजना के अन्तर्गत पेंशनरों को घर बैठे ही पेंशन प्राप्त हो सकेगी। आरम्भ में इस योजना को पायलट आधार पर कुल्लू व मण्डी जिलों में लागू किया जाएगा।

  • अन्तरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि 50000 रुपये

समाज में छूआछूत जैसी बुराई को दूर करने के उद्देश्य से राज्य में अन्तरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना आरम्भ की गई है। योजना के अन्तर्गत सामान्य जाति के ऐसे युवक व युवतियां, जिन्होंने अनुसूचित जाति के युवक या युवति से विवाह किया है, को 50 हजार रुपये की राशि प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान की जा रही है। 70 प्रतिशत से अधिक विकलांगता वाले युवक व युवतियों को विवाह के लिये दिये जाने वाले विवाह अनुदान को भी 15000 रुपये से बढ़ाकर 40000 रुपये किया गया है।

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के ऐसे व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय 35000 रुपये से कम है तथा जिनके नाम पर राजस्व रिकार्ड में भूमि उपलब्ध है और जिनका अपना कोई मकान नहीं है, को आवासीय सुविधा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से गृह निर्माण के लिये 75000 रुपये के गृह अनुदान का प्रावधान किया गया है। योजना के अन्तर्गत पात्र व्यक्तियों को घर की मुरम्मत के लिये 25000 रुपये की राशि बतौर अनुदान प्रदान की जा रही है।

सफाई कर्मचारी व सिवरेज ट्रीटमेन्ट प्लांट में कार्यरत कर्मियों को जीवन बीमा के अन्तर्गत लाया गया है। अनुसूचित जाति वर्ग बाहुल्य ऐसे गांवों जहां इन वर्गों की आबादी 40 प्रतिशत या कुल जनसंख्या 200 से अधिक है, के समग्र विकास व मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिये प्रदेश में मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम योजना आरम्भ की गई है। इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में दो ऐसे गांवों का चयन करके इन गांवों का समग्र विकास सुनिश्चित बनाया जा रहा है। योजना के अन्तर्गत गत वित्त वर्ष के दौरान 12 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।

हिमाचल प्रदेश सामाजिक सेवा क्षेत्र में कई मानकों में देश के अन्य राज्यों से आगे हैं जो इस दिशा में प्रदेश सरकार के प्रयासों की सार्थकता को दर्शाते हैं।

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