हेपेटाईटिस वायरस से करें बचाव, साफ भोजन एवं पीने का पानी उबाल कर ही पीएं

पीलिया के रोग से बचना है तो करें उबले पानी का सेवन : डॉ. प्रेम मच्छान

पीलिया के रोग से बचना है तो पीएं उबला पानी : डॉ. प्रेम मच्छान

पीलिया के रोग से बचना है तो पीएं उबला पानी : डॉ. प्रेम मच्छान

पीलिया एक वायरल है जिसे “जॉण्डिस या पीलिया” कहा जाता है। यह लीवर का एक खतरनाक रोग है। हेपेटाइटिस के प्रति लोगों कि अज्ञानता और इसके दुष्प्रभावों को समझने कि हमारी विफलता के कारण यह रोग हर साल दुनिया भर में लाखो लोगो को अपना शिकार बना रहा है। पीलिया रोग किसी भी अवस्‍था के व्‍यक्ति को हो सकता है। लेकिन रोग की उग्रता रोगी की अवस्‍था पर भी निर्भर करती है। वहीं प्रतिदिन पीये जाने वाले पानी की अशुद्धता के कारण पीलिया रोग के लक्षण भी अधिक पाये जाते हैं। इसलिये यदि इस रोग से बचना है तो नियमित रूप से प्रत्येक व्यक्ति को उबला हुआ पानी चहिये। पीलिया रोगी को ठीक होने में 2-4 सप्ताह का समय लगता है। लेकिन आवश्यकता है इस बारे में सावधानी बरतने के साथ-साथ डॉक्टर से सही परामर्श लेने की ओर उनकी देखरेख में दवाई का सेवन करने की। जी हाँ इस बार हम आपको पीलिया के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। कि पीलिया के लक्षण, सावधानी और कारण क्या हैं और हम इससे किस प्रकार बचाव कर सकते हैं। प्रस्तुत हैं आईजीएमसी अस्पताल चिकित्सालय के मेडिसन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रेम मच्छान से मीना कौंडल की बातचीत के महत्वपूर्ण अंश :

प्रश्न: “जॉण्डिस या पीलिया” क्या है?

उत्तर: पीलिया के प्रमुख 5 प्रकार है। हेपेटाईटिस ए, हेपेटाईटिस बी, हेपेटाईटिस सी, हेपेटाईटिस डी, हेपेटाईटिस इ, हेपेटाईटिस जी। इन सब में हेपेटाईटिस बी सबसे खतरनाक माना जाता है। हेपेटाईटिस बी में यकृत /लीवर को क्षति पहुंचा सकता है। हेपेटाईटिस ए, बी और सी ज्यादा मात्रा में देखा जाता है। विषाणु जनित यकृतशोथ पीलिया एक प्रकार के वायरस से होने वाला रोग है, जो इस रोग से पीड़ित रोगी के मल के संपर्क में आये हुए दूषित जल, कच्ची सब्जियों आदि से फैलता है कई लोग इससे ग्रस्त नहीं होते है उनके मल से इसके वायरस दूसरों तक पहुंच जाते हैं पेट से यह लीवर में और वहां से सारे शरीर में फ़ैल जाता है।

प्रश्न: पीलिया के लक्षण क्या हैं जरा विस्तार से बताएं?

उत्तर: अगर त्वचा का रंग पीला सा है, आंखों में पीलापन है और मूत्र भी पीले रंग का आए तो यह लक्षण पीलिया के हो सकते हैं। हेपेटाईटिस के अन्य सामान्य लक्षण भी हैं जैसे बदन दर्द, सिरदर्द, कमजोरी या थकान, भूख कम लगना, जी मचलाना, दस्त लगना या कब्ज होना, बुखार पेट में दाएँ तरफ, ऊपर की ओर हल्का दर्द या फिर शरीर में खुजली होना, जोड़ो में दर्द, हलके रंग का मल होना। पीलिया रोगी को अनेक बार खाने में भी किसी प्रकार का स्वाद नहीं आता है। स्टूल में बदलाव में होता है। जिस इंसान को पीलिया होता है उसके बिलिरुबिन की अत्यधिक मात्रा का अधिकतर हिस्सा यूरीन में निकल जाता है, लेकिन जितना हिस्सा बचता है वो पूरे शरीर की कोशिकाओं में फैल जाता है। और इसी वजह से स्टूल का रंग बदल जाता है। कई बार पेट दर्द पीलिया बिले डक्ट में बिलिरूबिन की रूकावट के कारण भी हो सकता है। ये रूकावट आमतौर पर गालस्टोन के रूप में या फिर बाइल डक्ट में सूजन के कारण होती है। इससे पिगमेंट का स्तर बढ़ जाता है। बहुत से लोगों को ऐसे में पेट दर्द होता है। आमतौर पर ये दर्द पेट के दाहिने तरफ होता है। अत्यधिक थकान भी महसूस होती है। जिन लोगों को पीलिया होता है उनमें सबसे सामान्य लक्षण थकान है। ये आमतौर पर प्राइमरी बाइलिअरी सर्होसिस प्राइमरी स्केरोसिंग कोलेंजाटाइस और बाइल डक्ट सिंड्रोम में होता है।

पीलिया होने पर कई बार उल्टियां भी होती हैं पीलिया में उल्टी और मतली की शिकायत भी हो सकती है। पीलिया होने पर खुजली की समस्या भी शरीर में होती है।

पीलिया के रोग से बचना है तो पीएं उबलाकर पानी

पीलिया के रोग से बचना है तो पीएं उबलाकर पानी

कोलेस्टासिस की वजह से जिन लोगों को पीलिया होता है उनको खुजली की शिकायत भी हो जाती है।शुरुआत में खुजली हाथों में होती है और फिर पैरों में। फिर धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाती है। रात को खुजली की ये समस्या काफी बढ़ जाती है।

नींद से जुड़ी समस्याएं भी पीलिया होने पर हो सकती है। जिन लोगों को पीलिया होता है उनमें नींद से जुड़ी समस्याएं काफी आम है। दर्दरहित पीलिया:जब पीलिया में दर्द महसूस नहीं होता तो संभव है कि बालइ डक्ट में रुकावट आ रही हो। इस तरह के मामलों में पीलिया में, त्वचा पीली होने के साथ साथ, वजन घटना या दस्त या कब्ज़ जैसे लक्षण भी सामने आते हैं।

प्रश्न: पीलिया होने के कारण क्या हैं?

उत्तर: पीलिया रक्त में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाने के कारण होता है। हेपेटाइटिस वायरस का प्रवेश शरीर में पानी, विषाणुयुक्त सुई, या बच्चे को माँ द्वारा होता है। हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस ई खाने और पानी के द्वारा शरीर में पहुंचता है। हेपेटाइटिस ए साधारणतः भारत में पाया जाता है इससे महामारी फैलने का खतरा रहता है। हेपेटाइटिस ई उन स्थानों पर पाया जाता है जहां सफाई आदि का प्रबन्ध ठीक न हो। खास तौर से पीने का पानी साफ ना होना। हेपेटाइटिस बी और सी रक्त और रक्त में इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं जैसे सुई का पूरी तरह कीटाणुरहित न होना। इसके अलावा टेटू लगाना, पुराने रेजर का इस्तेमाल करना इत्यादि कारणों से भी हेपेटाइटिस बी और सी हो सकता है।

प्रश्न: पीलिया से किस प्रकार बचाव किया जा सकता है?

उत्तर: पीलिया ग्रसित होने पर लापरवाही न करें इसका उपचार पीलिया के कारण पर निर्भर करता है, तुरंत चिकित्सक से परामर्श करें जिससे वह जांच कर रोग के कारण जानकर उचित उपचार कर सके। पीलिया ग्रसित मरीज को कोई भी दवा डॉक्टर के परामर्श बगैर नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि अनेक दवाएं लीवर को नुकसान पहुंचा सकती है तथा रोग को जटिल और गंभीर बना सकती है। कुछ प्रकार का पीलिया जैसे वायरस हिपेटाइटिस अपने आप ठीक हो जाता है, इसका लाभ झाड़-फूंक करने वाले उठाते हैं।

वायरस हिपेटाइटिस से बचाव के लिये भोजन, पेय और पानी की स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखें, असंक्रमित इन्जेक्शन, औजार का प्रयोग करें, रक्त चढ़वाने की जरूरत होने पर हिपेटाइटिस का जांचा गया रक्त ही चढ़ाया जाए। हिपेटाइटिस ए और बी का टीका उपलब्ध है, लगवा लेने से इस रोग से बचाव संभव है। संतुलित भोजन का सेवन करें पर वसा की मात्रा कम होनी चाहिए। दवाइयों का सेवन मनमर्जी से कतई न करें। शराब लीवर के मरीजों के लिए जहर के सामान है, इससे बचें। जब भी रोगी का यह लगे कि उसका शरीर पीला हो रहा है तथा उसे पीलिया हो सकता है, तो वह पानी की मात्रा बढ़ा दे क्योंकि पानी की मात्रा कम होने पर शरीर से उत्सर्जित होने वाले तत्व रक्त में मिल जाते हैं। इससे व्यक्ति की हालत बिगडऩे लगती है।

प्रश्न: पीलिया होने पर खाने में किस प्रकार का परहेज आवश्यक है?

उत्तर: पीलिया रोगी को हर प्रकार की वस्तु खिलाये, किसी प्रकार का परहेज न करें।जिस कारण उसमें अन्य और बीमारियां जन्म ले लेती है। अत: उसे संतुलित आहार और यहाँ तक कि उसे हाई कैलोरी वाली वस्तुयें खाने को देनी चाहिये ताकि वह शीघ्र स्वस्थ हो। उबला हुआ पानी पीना चाहिये। बाहर का खाना विशेषतः वो खाना जो ठीक से पका ना हो उसे ना खाएं। गोल गप्पे, चाट, चुस्की में पीलिया फैलाने वाले वायरस होते हैं। इन विक्रेताओं से दूर रहें घर से बने हुए खाने को महत्व दें।

एक साफ सुथरे रोटीन का पालन करने से पीलिया के साथ बहुत सी बीमारियां दूर रहती हैं। खाने से पहले और बाथरूम का प्रयोग करने के बाद डिसिन्फेक्टेंट साबुन से हाथ साफ अवश्य करें। अपने साथ पेपर सोप या हैंड सैनिटाइज़र ज़रूर रखे। रसोईघर और बर्तन साफ रखें। स्कूल और ऑफिस के लिए लंच पैक करते समय ध्यान रखें कि खाने को ठीक प्रकार से आलमुनियम फाएल में पैक करें और चम्मच और फार्क देना ना भूलें।बच्चे को कुछ ज़रूरी निर्देश देना ना भूलें। उन्हें सफाई के बारे में समझाएं और गंदगी से होने वाली बीमारियों के बारे में भी निर्देश दें। पीलिया ज्यादातर पानी से होने वाली बीमारियों से फैलता है। पीलिया की शुरूवात में आंखें, नाखुन और त्वचा पीली हो जाती हैं इसलिए ऐसे लक्षणों का ध्यान दें। बच्चे में खाने की कमी या कमज़ोरी को नज़रअंदाज़ ना करें। एक संतुलित आहार में कार्बोहाइड्रेट, कैल्शीयम, मिनेरल और प्रोटीन होना चाहिए जिससे शरीर में रोगों से लड़ने की ताकत बनी रहे। जैसे फलों का जूस, बेक्ड चिकन और दूध।

प्रश्न: पानी की अशुद्धता से आजकल पीलिया बहुत फ़ैल रहा है? इसके लिए किस प्रकार की सावधानी बरतनी आवश्यक है?

उत्तर: पानी की अशुद्धता से पीलिया होता है। प्रतिदिन पीये जाने वाले पानी की अशुद्धता के कारण पीलिया रोग के लक्षण पाये जाते हैं। इसलिये यदि इस रोग से बचाव के

पीलिया रोग किसी भी अवस्‍था के व्‍यक्ति को हो सकता है।

पीलिया रोग किसी भी अवस्‍था के व्‍यक्ति को हो सकता है।

लिए नियमित रूप से प्रत्येक व्यक्ति को उबला हुआ पानी पीना चहिये। कम से कम 10 से 15 मिनट पानी को उबाल कर पीएं। बाहर का खाना और पानी ना पीएं। पीलिया आमतौर पर हेपेटाइटिस ए वायरस की वजह से होता है जो दूषित या संक्रमित खानपान से फैलता है। कुछ और बीमारियां जिनमें लिवर पर असर पड़ता है, उसमें भी पीलिया होने की आशंका रहती है। यदि जीवन में पीलिया रोग से बचना है तो प्रत्येक व्यक्ति को आजीवन उबला हुआ पानी पीना चाहिये। साफ पानी का इस्तेमाल बहुत ही ज़रूरी है।

प्रश्न: क्या खाने में किसी विशेष प्रकार का परहेज आवश्यक है? कहा जाता है कि पीलिया होने पर रोगी को पीली वस्तु नहीं खिलानी चाहिए?

उत्तर: इसमें ज्यादा परहेज की आवश्यकता नहीं है। पीलिया के रोगी को ठीक होने में 2-4 सप्ताह का समय लगता है। पीलिया होने पर रोगी को पीली वस्तु भी खिला सकते हैं उसके लिये किसी भी वस्तु का परहेज न करें। जरूरी है रोगी को थोड़े-थोड़े समय बाद खाने को देते रहे। पीलिया होने पर अगर बहुत थकान महसूस हो रही है, तो ही विश्राम करें। यूँ आप घर-ऑफिस का काम कर सकते हैं।

प्रश्न: पीलिया के रोग की रोकथाम एवं बचाव के बारे में ओर विस्तार से जानकारी दें?

उत्तर: पीलिया रोग के प्रकोप से बचने के लिये कुछ साधारण बातों का ध्‍यान रखना जरूरी है। खाना बनाने, परोसने, खाने से पहले व बाद में और शौच जाने के बाद में हाथ साबुन से अच्‍छी तरह धोना चाहिए। भोजन जालीदार अलमारी या ढक्‍कन से ढक कर रखना चाहिये, ताकि मक्खियों व धूल से बचाया जा सकें। ताजा व शुद्ध गर्म भोजन करें दूध व पानी उबाल कर काम में लें। पीने के लिये पानी हमेशा उबला हुआ लें। मल, मूत्र, कूड़ा-करकट सही स्‍थान पर गढ्ढा खोदकर दबाना या जला देना चाहिये। गंदे, सड़े, गले व कटे हुये फल नहीं खायें धूल पड़ी या मक्खियां बैठी मिठाईयों का सेवन नहीं करें। स्‍वच्‍छ शौचालय का प्रयोग करें। रोगी को डॉक्टर की सलाह से ही दवा दें। इन्‍जेक्‍शन लगाते समय सिरेन्‍ज व सूई को 20 मिनट तक उबाल कर ही काम में लें अन्‍यथा ये रोग फैलाने में सहायक हो सकती है। रक्‍त देने वाले व्‍यक्तियों की पूरी तरह जांच करने से बी प्रकार के पीलिया रोग के रोगवाहक का पता लग सकता है। भोजन पकाने और खाने से पहले तथा शौचालय से लौटने पर हाथों को साबुन या डेटोल से अच्छी तरह धोएं। नाखूनों को समय-समय पर काटते रहें। अपने आसपास पूरी तरह से साफ-सफाई बनाए रखें और मक्खियों को न फैलने दें। पानी में क्लोरीन की गोलियां मिलाकर प्रयोग करें। बाजार के कटे फल और सब्जियां न खाएं। घर में भी सब्जी और फलों को अच्छी तरह धोकर ही प्रयोग करें। अपने बच्चो को भी डॉक्टर कि सलाह अनुसार हेपेटाइटिस का वैक्सीन लगाना चाहिए।

प्रश्न: पीलिया झाड़ना या उतारना कितना सही कितना गलत है?

उत्तर: पीलिया झाड़ना जैसी बातों पर विश्वास करना गलत है। बेहतर है कि आप डॉक्टर से इस बारे में सलाह लें।

प्रश्न: गर्भावस्‍था के दौरान पीलिया कितना खतरनाक हो सकता है?

उत्तर: गर्भावस्‍था में पीलिया की बीमारी अधिक भयानक रूप धारण कर सकती है। सही समय पर इस बीमारी की जानकारी हो जाए तो इसका इलाज सम्भव है जिससे कि मां और होने वाले शिशु को खतरा कम हो जाता है और मां एक स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकती है। गर्भवती महिला को अगर यह बीमारी होती है तो उसको थकावट ज्यादा होना, भूख न लगना, पेट में दर्द होना, पूरे शरीर, आँखों तथा नाखून का रंग पीला होना तथा पेशाब का रंग गहरा पीला प्रतीत होता है। कभी-कभी किसी मरीज को पूरे शरीर में खुजली का होना भी एक लक्षण है।

पीलिया एक वायरल है जिसे “जॉण्डिस या पीलिया” कहा जाता है

पीलिया एक वायरल है जिसे “जॉण्डिस या पीलिया” कहा जाता है

वैसे तो पीलिया कई प्रकार का होता है। बीसीडीई पर गर्भवती महिलाओं में अधिकतर पीलिया होता है। एक आम पुरुष या महिला की बजाय गर्भवती महिला को पीलिया की बीमारी ज्यादा प्रभावित करती है यानी कि गर्भावस्‍था में पीलिया की बीमारी अधिक गम्भीर रूप ले सकती है जिससे माँ और होने वाले बच्चे दोनों पर बहुत बुरा असर पड़ता है। गर्भावस्‍था में इस बीमारी का पता लगते ही तुरन्त नियन्त्रण न किया जाए तो गर्भवती स्त्री को अनेक खतरों का सामना करना पड़ सकता है जैसे दिमाग में सूजन आ जाने से दौरे पड़ना, जिगर में दर्द होना, आँखों की रोशनी का कम होते जाना, गुर्दे में पीलिया की वजह से पेशाब का बन्द होना, ब्लड प्रेशर का अचानक कम होते जाना, अचानक शरीर से खून का रिसाव (मुँह से तथा मल से)। आवश्यक है कि महिला गर्भावस्‍था के पहले माह या सप्ताह में ही अपने डॉक्टर से पूरी जानकारी और सलाह लें और उसे मानें। अपनी मर्जी से किसी भी प्रकार की दवा न लें।

प्रश्न: क्या पीलिया से गर्भावस्‍था में स्त्री व शिशु की जान को भी खतरा हो सकता है?

उत्तर: पीलिया के अधिक गम्भीर होने से गर्भावस्‍था में स्त्रियों तथा उसमें शिशु की जान जाने का भी खतरा बढ़ जाता है। भारत में 100 में से 2 प्रतिशत महिलाएँ इस कारण मौत की चपेट आ जाती हैं।गर्भावस्‍था में पीलिया से नए पैदा हुए शिशुओं की जान को खतरा रहता है। कभी-कभार बच्चा पेट के अन्दर ही मर जाता है या बच्चा समय से पहले पैदा हो जाता है जिससे उसके दिमाग में कभी-कभी सूजन आ जाने से उनका दिमाग पूरी तरह से परिपक्व नहीं हो पाता है। समय से पहले पैदा होने पर कई बार नए पैदा हुए बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हुए होते हैं जिससे उन्हें साँस लेने में तकलीफ हो सकती है। इसलिए समय से बीमारी का पता चलते ही अपने डॉक्टर से पीलिया का इलाज करवाएँ जिससे समय रहते गर्भवती स्त्री तथा उसके बच्चे का सही तरह से उपचार हो सके।

 

 

 

 

 

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