चुनाव आयोग का भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सत्ती को फिर नोटिस जारी...

वर्तमान सरकार योजना के तहत मुफ्त बल्ब देने के बजाए गरीबों को दोनों हाथों से लूटने का कर रही प्रयास : सत्ती

शिमला : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि केन्द्र सरकार की फ्लैगशिप योजना ’’डोमेस्टिक एफिशियेंट लाईटिंग प्रोग्राम’’ को हिमाचल में कार्यान्वित करने के दौरान प्रदेश सरकार व ऊर्जा मंत्रालय द्वारा भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है। सस्ते दामो में एलईडी बल्ब को खरीदकर प्रदेश के लोगों को महंगे दामों पर बेचा जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय की शह के बिना इतने बड़े पैमाने पर हेराफेरी संभव नहीं है। मुख्यमंत्री को चाहिए कि इस सारे मामले की पारदर्शी जांच के लिए निष्पक्ष जांच एजेंसी से जांच करवाएं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार 9 वॉट के एलईडी बल्ब की खरीद 64.41 रू. में कर रही है, वहीं हिमाचल प्रदेश सरकार 7 वॉट के बल्ब को उपभोक्ताओं को 100 रू. में दे रही है। थोक भाव में 7 वॉट का बल्ब 55 से 60 रू. में उपलब्ध है। इस तरह प्रत्येक बल्ब में 30 से 40 रू. बिचोलियों के माध्यम से बचाए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार ने इस तरह के 1.25 करोड़ बल्ब बांटने की योजना बनाई है और इसके तहत अब तक 43 लाख 7 हजार बल्ब बांटे जा चुके हैं। जिसमें लगभग 15 से 16 करोड़ रू. के हेराफेरी की आशंका है और यह प्रदेश सरकार की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। इसके अतिरिक्त क्वालिटी के मामले में भी प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध बल्ब बाजार में उपलब्ध 7 वॉट के बल्बों से कमतर है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि इस योजना के तहत केन्द्र से प्रदेश को कुल कितनी आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है? और विभाग द्वारा किस दर और अब तक कुल कितने एलईडी बल्बों की खरीद की गई है और जिन फर्मों के द्वारा यह खरीददारी की गई है उनके हिमाचल प्रदेश में रिप्रेजेंटेटिव कौन-2 है? मुख्यमंत्री अगर इस मामले में पाक साफ हैं तो पूर्व की भांति भ्रष्टाचार के किसी भी आरोप में गोलमोल जवाब देने के बजाए स्पष्ट उत्तर दें। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने बिजली एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए ’’अटल बिजली बजत योजना’’ कार्यान्वित की थी और उस समय इस योजना के तहत 16 लाख उपभोक्ताओं को 4-4 सीएफएल बल्ब निःशुल्क वितरित किए थे। जिस पर 65 करोड़ रू. खर्च किए और 270 मिलीयन यूनिट ऊर्जा की वार्षिक बचत सुनिश्चित की गई थी और इस कारण राज्य को 109 करोड़ रू. का अतिरिक्त वार्षिक राजस्व प्राप्त हुआ था। परन्तु वर्तमान सरकार इस योजना के तहत मुफ्त बल्ब देने के बजाए गरीबों को दोनों हाथों से लूटने का प्रयास कर रही है।

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