सीबीडीटी : मुकदमेबाजी कम करने के लिए पहल

सीबीडीटी : मुकदमेबाजी कम करने के लिए पहल

नई दिल्ली: करदाताओं के साथ मुकदमेबाजी को कम करने पर आयकर विभाग अपना ध्यान केंद्रित करता रहा है। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने विवादों में काफी कमी सुनिश्‍चि‍त करने और लंबे समय से चली आ रही मुकदमेबाजी का सामना कर रहे करदाताओं को राहत प्रदान करने के लिए दिसंबर, 2015 तक के पिछले तीन महीनों के दौरान अनेक कदम उठाए हैं।

विभाग द्वारा अपील दाखिल करने के लिए मौद्रिक सीमा में संशोधन करने वाला परिपत्र भी सीबीडीटी द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों में शामिल है। इसका मुख्‍य उद्देश्य मुकदमेबाजी को कम करना है। करदाताओं की शिकायतों में कमी सुनिश्‍चि‍त करने के लिए सीबीडीटी द्वारा की गई पहल के तहत ही यह कदम उठाया गया है। सीबीडीटी ने ऐसे मामलों में विभाग की ओर से दाखिल अपीलों को उच्च न्यायालयों से वापस लेने पर विचार करने के लिए मुख्य आयकर आयुक्तों का एक कॉलेजियम गठित करने के लिए प्रधान मुख्य आयुक्तों को निर्देश दिया है जिनमें कर रकम संशोधित मौद्रिक सीमा से ज्‍यादा है या जिनमें कानून का कोई सवाल ही निहित नहीं है अथवा जिनमें यह मान लिया गया है कि मुद्दे को विभाग द्वारा निपटा दिया गया है या जिनमें अपील बाद में किए गए संशोधन के मद्देनजर अब प्रासंगिक नहीं है।

इसके अलावा, सीबीडीटी ने निम्‍नलिखित सूचीबद्ध विषयों से संबंधित निपटाए जा चुके मुद्दों पर अपील वापस लेने या उन पर अपील हेतु दबाव नहीं डालने के लिए अनेक परिपत्र जारी किए हैं :

  • परित्यक्त फीचर फिल्मों के मामले में आयकर नियमों 1962 के नियम 9ए का लागू नहीं होना।
  • कर निर्धारण वर्ष 2014-15 से पहले की अवधि के लिए आयकर अधिनियम की धारा 2 (14) (iii) (ख) के प्रयोजन के लिए दूरी को मापना।
  • गैर-वैधानिक तरलता अनुपात (गैर-एसएलआर) प्रतिभूतियों पर ब्‍याज।
  • आयकर अधिनियम की धारा 43(बी) के संदर्भ में कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े कोष में नियोक्ता के अंशदान की अनुमति देना।

प्रासंगिक परिपत्र विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in पर उपलब्ध हैं।

सम्बंधित समाचार

अपने सुझाव दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *