प्रदेश व राष्ट्रीय मुद्दा

आग में सुलगती “हिमाचल की वन संपदा”

आग में सुलगती “हिमाचल की वन संपदा”

(विशेष लेख) हिमाचल प्रदेश की पहचान हरी-भरी वादियों ऊंचे-ऊंचे पर्वतों और हरे-भरे पेड़ पौधों से यानि हरियाली से है। ये हरे भरे पेड़-पौधे जहां हमारे पर्यावरण को दूषित होने से बचाते हैं। तो वहीं अगर...

प्रदेश का शिक्षा स्तर : बातें, आलोचनाएं, चर्चाएं व दावे तो बहुत, पर वास्तविकता...क्या !

शिक्षा : बातें, आलोचनाएं, चर्चाएं व दावे तो बहुत, पर वास्तविकता…क्या !

विशेष लेख : जिसकी चलती है वो चला रहा है, जिसकी नहीं चलती वो धक्के खा रहा है… शिक्षा स्तर पर भी बड़ी-बड़ी बातें होती हैं लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं किस-किस सिस्टम पर बात की जाए, सभी सवालों के कटघरे...

ग्लोबल वार्मिंग : ...किस दिशा में, किस विकास की ओर बढ़ रहे हैं खुद भी पता नहीं?

ग्लोबल वार्मिंग : …किस दिशा में, किस विकास की ओर बढ़ रहे हैं… हम ?

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से प्रकृति में तेजी से परिवर्तन….. चिंता का विषय  “प्राकृतिक संपदा से किया खिलवाड़, तो आएगी विनाश की बाढ़” ग्लोबल वार्मिंग को लेकर पूरा विश्व चिंतित ग्लोबल वार्मिंग इस...

child labour

अभाव में पलता… “बचपन”

जीवन का यह एक कटु सत्य है कि मासूम बच्चों का जीवन कहीं तो खुशियो से भरपूर है। तो कहीं खुशियों से महरूम। बच्चों के हाथों में कलम और आंखो में भविष्य के सपने होने चाहिए। लेकिन दुनिया में करोड़ों...

कहीं फसलों के सही न मिलते दाम, तो कहीं जंगली जानवरों का कहर...कहीं आसमान से गिरती आपदा, तो कहीं सूखे की मार...क्या करे किसान

कहीं फसलों के सही न मिलते दाम, तो कहीं जंगली जानवरों का कहर…कहीं आसमान से गिरती आपदा, तो कहीं सूखे की मार…क्या करे “किसान”

किसानों की आत्महत्या की वजह प्राकृतिक भी है और कृत्रिम भी कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2012-13 में कृषि विकास दर 1.2 प्रतिशत यह तो हम जानते ही हैं और बचपन से पढ़ते और सुनते भी आये हैं कि भारत...

कुछ दिन बवाल फिर चुप्पी...

कुछ दिन बवाल फिर चुप्पी…

पीड़ाजनक दौर से गुजर रही हैं देश की बेटियां…कुछ दिन बवाल और फिर चुप्पी पीड़ाजनक दौर से गुजर रही हैं देश की बेटियां…कुछ दिन बवाल और फिर चुप्पी कब देश की बेटियां अपने आपको महसूस करेंगी…....

सदियों से यूं ही खामोश खड़े रह गए जो कुछ दरख्त...

सदियों से यूं ही खामोश खड़े रह गए जो कुछ “दरख्त”…

…आज भी ऊंचे-ऊंचे वो कुछ दरख़्त यूँ ही खामोश खड़े हैं कभी फुर्सत से इन ऊंचे-ऊंचे दरख्तों की भी खामोशी सुनें… खामोश खड़े ऊंचे-ऊंचे दरख्तों की उदासी “अपनी प्राकृतिक संपदा को बचाना हमारा...