प्रदेश व राष्ट्रीय मुद्दा

ग्लोबल वार्मिंग : ...किस दिशा में, किस विकास की ओर बढ़ रहे हैं खुद भी पता नहीं?

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से प्रकृति में तेजी से परिवर्तन….चिंता का विषय

 “प्राकृतिक संपदा से किया खिलवाड़, तो आएगी विनाश की बाढ़” ग्लोबल वार्मिंग को लेकर पूरा विश्व चिंतित ग्लोबल वार्मिंग : …किस दिशा में, किस विकास की ओर बढ़ रहे हैं… हम ? ग्लोबल वार्मिंग इस बारे...

आग में सुलगती “हिमाचल की वन संपदा”

हर वर्ष आग से राख हो रही “हिमाचल की करोड़ों की वन संपदा”

(विशेष लेख) हिमाचल प्रदेश की पहचान हरी-भरी वादियों ऊंचे-ऊंचे पर्वतों और हरे-भरे पेड़ पौधों से यानि हरियाली से है। ये हरे भरे पेड़-पौधे जहां हमारे पर्यावरण को दूषित होने से बचाते हैं। तो वहीं अगर...

"देश" में इस वक्त "एकता" व "सतर्कता" दोनों जरूरी....

“देश” में इस वक्त “एकता” व “सतर्कता” दोनों जरूरी….

हर देशवासी का फर्ज: संयम बरते और एकजुटता के साथ भारत सरकार व भारत सेना का मनोबल बढ़ाए…. सोशल मीडिया से जुड़े लोग भ्रमित और अफ़वाहों वाले मैसेज न पोस्ट करें देश में “एकता” व “सतर्कता” की...

कौन सुनेगा किसको सुनाएं इसलिए.....आवाज उठाएं सबको बताएं!

समस्याओं के “चक्रव्यूह” में उलझा हर आमजन

ये समस्याएं आज नहीं पनपी वर्षों पुरानी हैं…. अपने घरों की नींव तो मजबूत कर ली परन्तु आम आदमी के कच्चे घरों को ढहा दिया जो ईमानदार व नेक नेता और अधिकारी होगा वो आपकी सुनेगा… आज सुबह गांव से...

हिमाचल: किसानों व बागवानों से 130 शिकायतें प्राप्त, बकाया राशि शीघ्र देने के प्रयास

फलों व फसलों को उगाने से लेकर मंडियों तक पहुंचाना नहीं आसान, फिर दाम उचित न मिलने की वेदना से आहत होता बागवान व किसान

“किसान व बागवान हमारे हिमाचल का मान, फसलों से लहराते खेत, बागों में उगते सेब हम सबकी है शान ’’ अधिकतर किसानों की फसल का नफा-नुकसान मौसम पर निर्भर…. प्रदेश सरकार किसानों व बागवानों को विभिन्न...

उगते सूरज की ढलती शाम... हिमाचल में नशे का फैलता मीठा जहर

उगते सूरज की ढलती शाम… हिमाचल में नशे का फैलता मीठा जहर

हिमाचल में फल-फूल रहा जहर का कारोबार चंद रुपयों के लिए हिमाचल को दागदार करने में जुटे हुए नशा तस्कर हिमाचल में नशे के पसरते पांव नशे का फैलता मीठा जहर दीमक की तरह खोखला कर रहा हिमाचली युवाओं को...

प्रदेश का शिक्षा स्तर : बातें, आलोचनाएं, चर्चाएं व दावे तो बहुत, पर वास्तविकता...क्या !

शिक्षा : बातें, आलोचनाएं, चर्चाएं व दावे तो बहुत, पर वास्तविकता…क्या !

विशेष लेख : जिसकी चलती है वो चला रहा है, जिसकी नहीं चलती वो धक्के खा रहा है… शिक्षा स्तर पर भी बड़ी-बड़ी बातें होती हैं लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं किस-किस सिस्टम पर बात की जाए, सभी सवालों के कटघरे...