धर्म/ संस्कृति (Page 2)

धौलाधार पर्वत श्रृंखला में स्थित 52 शक्तिपीठों में से एक “श्री ब्रजेश्वरी देवी” मंदिर

धौलाधार पर्वत श्रृंखलाओं में बसी “माँ ब्रजेश्वरी”

“देवभूमि हिमाचल” जिसके कण-कण में सदियों से देवी-देवता का वास है। वहीं इस देवभूमि में मां भवानी के 52 शक्तिपीठों में से एक-दो नहीं बल्कि आधा दर्जन शक्तिपीठ हैं। हिमाचल प्रदेश के सबसे पड़े जनपद...

शिमला की खूबसूरत पहाड़ी पर "माँ तारादेवी" का त्रिगुणात्मक शक्तिपीठ धाम का इतिहास

शिमला की खूबसूरत पहाड़ी पर “माँ तारादेवी” का शक्तिपीठ धाम

शिमला की खूबसूरत पहाड़ी पर माँ तारादेवी का त्रिगुणात्मक शक्तिपीठ धाम स्थित है। जहाँ श्रद्धालु दूर-दूर से माँ के चरणों में शीश नवाने पहुंचते हैं।  पहाडियों पर बसा यह मंदिर लोगों के आकर्षण का...

"ॐ " के उच्चारण का रहस्य

“ॐ” के उच्चारण का रहस्य

ऊँ अर्थात् ओउम् तीन अक्षरों से बना है, जो सर्व विदित है । अ उ म्। अ का अर्थ है उत्पन्न होना, उ का तात्पर्य है उठना, उडऩा अर्थात् विकास, म का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् ब्रह्मलीन हो जाना। ऊँ...

सराहन में गिरा था सती का कान, जिससे प्रकट हुईं “माता भीमाकाली”

सराहन में गिरा था सती का कान, जिससे प्रकट हुईं “माता भीमाकाली”

प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण सराहन : लेखक : डॉ. सूरत ठाकुर मार्कण्डेय पुराण में “माता भीमाकाली” वर्णन मार्कण्डेय पुराण में वर्णन : राक्षसों के विनाश के लिए मैं हिमाचल भूमि में भीम रूप में...

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धार्मिक पर्यटन व आस्था का केंद्र “श्री नैना देवी जी”

हिमाचल प्रदेश जिसे देव भूमि कहा जाता है यहां बहुत से देवी-देवताओं का वास है। यहां की खास बात यह है कि यहां बहुत से देवी-देवताओं के कई पूजनीय तीर्थ स्थल हैं जहां दूर-दूर से भारी तादात में कई...

शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं के आंचल में बसा, स्वर्ण कलशों से सुसज्जित मंदिर “माँ चिंतपूर्णी”

शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं के आंचल में बसा, स्वर्ण कलशों से सुसज्जित मंदिर “माँ चिंतपूर्णी”

त्रिर्गत के तीन शक्तिपीठों में ज्वालाजी, वज्रेश्वरी और चिंतपूर्णी उल्लेखनीय शक्तिपीठ पहला स्थान माता वैष्णों देवी को दिया जाता है, जो जम्मू-कश्मीर में पड़ता है स्वर्ण कलशों से सजा...

नवरात्रों के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा को लेकर जिला प्रशासन द्वारा व्यापक प्रबंध

नवरात्रों में माता के नौ रुपों की आराधना…

शक्ति के लिए देवी आराधना की सुगमता का कारण मां की करुणा, दया, स्नेह का भाव किसी भी भक्त पर सहज ही हो जाता है। ये कभी भी अपने बच्चे (भक्त) को किसी भी तरह से अक्षम या दुखी नहीं देख सकती है। उनका...