धर्म व संस्कृति (Page 2)

“देव कमरूनाग” ...यहां स्थानीय ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के लोग भी होते हैं नतमस्तक

“देव कमरूनाग” … स्थानीय ही नहीं, देश-विदेश के लोग नतमस्तक

  कमरूनाग झील में समाया है अपार खजाना परंपरा के कारण सिक्कों और अमूल्य धातुओं का भारी भंडार हिमाचल को देवभूमि के नाम से ना केवल देशों में अपितु विदेशों में भी जाना जाता है। यहाँ हर देवी-...

देवताओं को पूजने, मानने के लिए खास तरीके, खास विधियां व विधान

हिमाचल (कुल्लू): देवी-देवताओं को पूजने, मनाने के खास विधि व विधान

यह मेरा देवता, वह तेरा देवता परिवार के देवते को कुलजा अथवा कुलज्ञ कहते हैं गांव के एक छोर पर ग्राम देवता का बना होता है स्थान या मंदिर हिमाचल के कुल्लू जनपद की बात करें तो यहां पर हर घर का अपना...

धनतेरस से शुरू नरक चतुर्दशी, दीवाली, गोवर्धन पूजा और भाईदूज तक त्यौहारों की धूम

धनतेरस से लेकर भाईदूज तक त्यौहारों की धूम

धनतेरस का पर्व 5 नवंबर के दिन इस बार धनतेरस का पर्व 5 नवंबर के दिन मनाया जाएगा। धनतेरस से आरंभ होते हुए नरक चतुर्दशी, दीवाली, गोवर्धन पूजा और भाईदूज तक यह त्यौहार उत्साह के साथ मनाया जाता है।...

दिवाली का पौराणिक महत्व, पंच-पर्वों का त्‍यौहार: दीपावली

दिवाली का पौराणिक महत्व, पंच-पर्वों का त्‍यौहार: दीपावली

दीपावली की पूरी रात दीपक प्रज्‍वलित रखते हैं, जिसके संदर्भ में हिन्‍दु धर्म में कई मान्‍यताऐं हैं, जिनमें से कुछ का वर्णन पिछले पोस्‍ट क्‍यों मनाते हैं दीपावली के अन्‍तर्गत किया था। उनके...

भाई-बहन के पावन संबंध व प्रेमभाव का त्यौहार : भाई दूज

भाई-बहन के पावन संबंध व प्रेमभाव का त्यौहार : भाई दूज

कार्तिक शुक्ल द्वितीय को भाई दूज का पर्व पूरे भारत वर्ष में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। दीवाली के त्यौहार के साथ केवल दीपमालाएं ही नहीं बल्कि अनेकों उत्सवों की मालाएं भी गुंथी हुई हैं।...

कुल्लू : 19 अक्तबूर से शुरू होगा अन्तर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा

देवी-देवताओं के महासंगम का गवाह : कुल्लू दशहरा

कुल्लू के दशहरे का अपना इतिहास, पृष्ठभूमि व सांस्कृतिक परम्परा कुल्लू में दशहरे का शुभारंभ 17वीं शताब्दी में हुआ देश भर में मनाया जाने वाला दशहरा पर्व जहां आसुरी शक्तियों पर दैवी शक्तियों की...

शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं के आंचल में बसा, स्वर्ण कलशों से सुसज्जित मंदिर “माँ चिंतपूर्णी”

शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं के आंचल में बसा, स्वर्ण कलशों से सुसज्जित मंदिर “माँ चिंतपूर्णी”

त्रिर्गत के तीन शक्तिपीठों में ज्वालाजी, वज्रेश्वरी और चिंतपूर्णी उल्लेखनीय शक्तिपीठ पहला स्थान माता वैष्णों देवी को दिया जाता है, जो जम्मू-कश्मीर में पड़ता है स्वर्ण कलशों से सजा...