धर्म व संस्कृति

धौलधार की ऊंचे पर्वत पर बसा प्राचीन मंदिर “भागसूनाग”

“भागसूनाग” के पवित्र जल के स्नान-पान करने से दूर होती हैं रोग-ब्याध्यिां

धौलधार के ऊंचे पर्वत पर बसा प्राचीन मंदिर “भागसूनाग” धर्मशाला में मकलोड़ गंज से दो किलो मीटर दूर धौलधार की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के आंचल में  5200 फुट की ऊंचाई पर स्थित भागसू नाग के प्राकृतिक...

अलौकिक अवतार गुरु नानकदेव जी

“गुरु नानकदेव जी” अलौकिक अवतार

भारत की पावन भूमि पर कई संत-महात्मा अवतरित हुए हैं, जिन्होंने धर्म से विमुख सामान्य मनुष्य में अध्यात्म की चेतना जागृत कर उसका नाता ईश्वरीय मार्ग से जोड़ा है। ऐसे ही एक अलौकिक अवतार गुरु...

सराहन में गिरा था सती का कान, जिससे प्रकट हुईं “माता भीमाकाली”

सराहन में गिरा था सती का कान, जिससे प्रकट हुईं “माता भीमाकाली”

प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण सराहन : लेखक : डॉ. सूरत ठाकुर मार्कण्डेय पुराण में “माता भीमाकाली” वर्णन मार्कण्डेय पुराण में वर्णन : राक्षसों के विनाश के लिए मैं हिमाचल भूमि में भीम रूप में...

बौद्ध धर्म के पुनरूत्थान के सम्बंध में गुगे राज्य का अभूतपूर्व योगदान

“लामा धर्म” आज भी अपनी ख्याति के साथ विद्यमान

तिब्बत, हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिलों किन्नौर तथा लाहुल-स्पिति में बौद्ध धर्म अपनी विलक्षणता के साथ विद्यमान है। गेरूआ वस्त्र पहने लामा, ऊंचाईयों में स्थित बौद्ध मठ, आकर्षक मूर्तियां व...

रामपुर बुशहर में स्थित तिब्बतीयन शैली में निर्मित दुम्ग्युर नामक बौद्ध मंदिर

रामपुर बुशहर में स्थित तिब्बतीयन शैली में निर्मित दुम्ग्युर बौद्ध मंदिर

बुशहर रियासत के टीका रघुनाथ सिंह ने सन 1895 ई. को स्थापित करवाया शिमला जिला के रामपुर उपमंडल में समुद्रतल से 1000 मीटर की ऊंचाई पर बौद्ध मंदिर रामपुर बस स्टैंड के पास स्थित है। रामपुर में तिब्बतीयन...

झील के रूप में पूजी जातीं हैं देवी "रेणुका"

इसलिए पड़ा झील का नाम “रेणुका”….

झील के रूप में पूजी जाती हैं माँ “रेणुका”,  राजा प्रसेनजित् की पुत्री थी देवी “रेणुका” हिमाचल में सदियों से ही देवी-देवताओं का वास रहा है। यहां के लोगों की देवी-देवताओं के प्रति गहरी...

"किन्नौर" किन्नर कैलाश की विशेष महत्ता के साथ संस्कृति, धर्म-परम्परा, रीति-रिवाज व पर्यटन के लिए भी विख्यात

“किन्नौर” किन्नर कैलाश की विशेष महत्ता के साथ संस्कृति, धर्म-परम्परा, रीति-रिवाज व पर्यटन के लिए भी विख्यात

मान्यता : किन्नर कैलाश केवल भगवान शिव का ही निवास स्थान नहीं, बल्कि यहां पर स्वर्ग का राज है “किन्नौर”  शिव की धरती से जहां विख्यात है वहीं किन्नौर अपनी संस्कृति, धर्म-परम्परा, रीति-रिवाजों,...