धर्म/ संस्कृति

हिमाचल : पर्यटन को विकसित करने के लिए 1900 करोड़ स्वीकृत, स्थानीय युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोज़गार के अवसर

हिमाचल : “शिशु के जन्म से लेकर नामकरण व मुंडन रीति-रिवाज”

जिस प्रकार किसी व्यक्ति की आदतें और उसकी अभिव्यक्ति का ढंग उसके चरित्र के द्योतक हैं, उसी प्रकार किसी समाज में प्रचलित रीति-रिवाज उसकी नैतिक चेतना के प्रतीक होते हैं। इस प्रकार रीति से...

मृकुला-प्राचीन मन्दिर बौद्ध तांत्रिक देवी वज्रवराह को समर्पित रहा है

सातवीं शताब्दी से लाहौल-स्पीति के उदयपुर गांव में बसा “मृकुला देवी मंदिर”

“मृकुला मंदिर” में कलकत्ते वाली मां काली हुई थीं अवतरित कश्मीरी कन्नौज शैली में बना है माँ मृकुला का मंदिर मंदिर में लकड़ी की दीवारों पर एक ओर महाभारत के दृश्य, दूसरी तरफ रामायण के प्रसंग...

पैगोड़ा और शिखरनुमा शैली में बना "माँ हाटकोटी मंदिर"

अपार शांति व अद्भूत शक्ति की अनुभूति होती है “माँ हाटकोटी” के दरबार में

हिमाचल के विख्‍यात मन्दिरों में से एक “माँ हाटकोटी” मंदिर का शीर्ष भाग पत्थर की स्लेट की ढलानदार छत से आच्छादित हाटकोटी को अर्जित है ‘पत्थर के मंदिरों की घाटी’ का खिताब हिमाचल जिसे...

शिमला की खूबसूरत पहाड़ी पर "माँ तारादेवी" का त्रिगुणात्मक शक्तिपीठ धाम का इतिहास

शिमला की खूबसूरत पहाड़ी पर “माँ तारादेवी” का शक्तिपीठ धाम

शिमला की खूबसूरत पहाड़ी पर माँ तारादेवी का त्रिगुणात्मक शक्तिपीठ धाम स्थित है। जहाँ श्रद्धालु दूर-दूर से माँ के चरणों में शीश नवाने पहुंचते हैं।  पहाडियों पर बसा यह मंदिर लोगों के आकर्षण का...

हिमाचल प्रदेश में गर्म पानी के चश्में, नाना प्रकार के औषधीय गुणों से युक्त हैं ये चश्में

हिमाचल प्रदेश में गर्म पानी के चश्में, कई प्रकार के औषधीय गुणों से युक्त हैं ये चश्में

हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक विविधता से भरपूर है। यहां कुल्लू, मण्डी और शिमला जिलों में गर्म पानी के चश्में पाए जाते हैं। यहां गर्म पानी के चश्में नाना प्रकार के औषधीय गुणों से युक्त है। इन...

हिमाचल प्रदेश के पैगोड़ा शैली में बने मंदिर

हिमाचल प्रदेश के पैगोड़ा शैली में बने मंदिर

हिमाचल प्रदेश के मण्डी, कुल्लू, किन्नौर, शिमला के पर्वतीय क्षेत्रों में पैगोड़ा शैली के असंख्य मंदिर हैं। राजा बाणसेन द्वारा 1346 में निर्मित मण्डी का पराशर मंदिर, मनाली का हिडिम्बा मंदिर जिसे...

हिमाचल : पर्यटन को विकसित करने के लिए 1900 करोड़ स्वीकृत, स्थानीय युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोज़गार के अवसर

ऐतिहासिक, पारम्परिक व सांस्कृतिक पहचान दर्शाती चौपाल की “वेशभूषा”

देश की बात हो या प्रदेश की उसकी जीवन शैली की पहचान वहां के रहने वाले लोगों, वेशभूषा, खानपान व आभूषणों से होती है। हांलाकि काफी समय से हमारे कई पारम्परिक परिधान और आभूषण लुप्त होते जा रहे हैं।...