त्यौहार व मेले

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने ऊना में पीजीआई सैटेलाईट केन्द्र की रखी आधारशिला

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने ऊना में पीजीआई सैटेलाईट केन्द्र की रखी आधारशिला

ऊना : मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर तथा केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी नड्डा ने आज ऊना जिला के मलहाट में 480 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले पीजीआई सैटेलाईट केन्द्र की आधारशिला रखी।...

"मंडी की अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि" धार्मिक, संस्कृतिक व पुरातात्विक का प्रतीक

“मंडी की अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि” धार्मिक, सांस्कृतिक व पुरातात्विक का प्रतीक

उत्तर-पश्चिमी भारत में भगवान शिव की पौराणिक गाथाएं गहरी जड़े जमाए हुए पूरे देश में शिवरात्रि का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन हिमाचल जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है यहां के...

सतलुज नदी के किनारे बसा तत्तापानी

लोहड़ी व मकर संक्रांति के दिन पूजा-अर्चना व तुला दान धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण

देशभर में जहां लोहड़ी खूब धूमधाम से मनायी जाती है। वहीं हिमाचल में भी पौष के मासांत में लोहड़ी खूब धूमधाम से मनाई जाती है। इससे पूर्व लड़के-लड़कियां घर-घर जाकर लुहकडिय़ां गाती हैं। निचले...

अलौकिक अवतार गुरु नानकदेव जी

“गुरु नानकदेव जी” अलौकिक अवतार

भारत की पावन भूमि पर कई संत-महात्मा अवतरित हुए हैं, जिन्होंने धर्म से विमुख सामान्य मनुष्य में अध्यात्म की चेतना जागृत कर उसका नाता ईश्वरीय मार्ग से जोड़ा है। ऐसे ही एक अलौकिक अवतार गुरु...

हिमाचल का सबसे पुराना व्यापारिक मेला "लवी"

हिमाचल के रामपुर का अंतरराष्ट्रीय मेला “लवी”

 रामपुर शहर का लवी मेला हिमाचल प्रदेश मेलों व त्यौहरों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। हर त्यौहार और मेले की अपनी एक खास महत्ता है। इतना ही नहीं बल्कि कुछ खास मेले व त्यौहार  देश में ही नहीं...

देवताओं को पूजने, मानने के लिए खास तरीके, खास विधियां व विधान

हिमाचल (कुल्लू): देवी-देवताओं को पूजने, मनाने के खास विधि व विधान

यह मेरा देवता, वह तेरा देवता परिवार के देवते को कुलजा अथवा कुलज्ञ कहते हैं गांव के एक छोर पर ग्राम देवता का बना होता है स्थान या मंदिर हिमाचल के कुल्लू जनपद की बात करें तो यहां पर हर घर का अपना...

हिमाचल में "घरेसू" (कहारू) जलाकर 8 दिन पहले ही हो जाती है दिवाली शुरू

हिमाचल: गाँव में दिवाली का आठ दिन पहले “घरेसू” (कहारू) जलाकर होता है आगाज

बच्चे सूखी घास के पूले का एक लंबा गटठा बनाकर जिसे आम भाषा में घरेसू या कहारू कहा जाता है। शाम को खाना खाने से पहले अंधेरा होने पर घरों से दूर खलियान, खुले मैदान या जगह पर घुमाते हुए जलाया जाता...