त्यौहार व मेले

"मंडी की अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि" धार्मिक, संस्कृतिक व पुरातात्विक का प्रतीक

“मंडी की अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि” धार्मिक, सांस्कृतिक व पुरातात्विक का प्रतीक

उत्तर-पश्चिमी भारत में भगवान शिव की पौराणिक गाथाएं गहरी जड़े जमाए हुए पूरे देश में शिवरात्रि का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन हिमाचल जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है यहां के...

हिमाचल : लोहड़ी व मकर संक्रांति पर हजारों की संख्या में श्रदालु तत्तापानी में स्नान कर करते हैं तुलादान

हिमाचल : लोहड़ी व मकर संक्रांति पर हजारों की संख्या में श्रदालु तत्तापानी में स्नान कर करते हैं तुलादान

हमारे पहाड़ी प्रदेशों में इस उत्सव को लोहड़ी, माघी व माघी साजा के नाम से जाना जाता है मकर संक्रांति  के दिन मीठे नमकीन बबरू और पकाई जाती है खिचड़ी देशभर में जहां लोहड़ी खूब धूमधाम से मनायी...

हिमाचल का सबसे पुराना व्यापारिक मेला "लवी"

हिमाचल के रामपुर का अंतरराष्ट्रीय मेला “लवी”

 रामपुर शहर का लवी मेला हिमाचल प्रदेश मेलों व त्यौहरों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। हर त्यौहार और मेले की अपनी एक खास महत्ता है। इतना ही नहीं बल्कि कुछ खास मेले व त्यौहार  देश में ही नहीं...

हिमाचल के सबसे दूर-दराज "डोडरा-क्वार" का इतिहास,संस्कृति व पर्यटन

“डोडरा-क्वार” अपने इतिहास,संस्कृति व पर्यटन के लिए विख्यात

डोडरा-क्वार की सांस्कृतिक यात्रा खेत-खलियान और बड़े बड़े हरे पेड़ पौधों में अपनेपन का एहसास हिमाचल अपने सौंदर्य, इतिहास,संस्कृति व पर्यटन के लिए अपनी विश्वभर में शानदार पहचान बनाए हुए है। ये...

भाई-बहन के पावन संबंध व प्रेमभाव का त्यौहार : भाई दूज

भाई-बहन के पावन संबंध व प्रेमभाव का त्यौहार : भाई दूज

कार्तिक शुक्ल द्वितीय को भाई दूज का पर्व पूरे भारत वर्ष में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। दीवाली के त्यौहार के साथ केवल दीपमालाएं ही नहीं बल्कि अनेकों उत्सवों की मालाएं भी गुंथी हुई हैं।...

भाई दूज: भाई को टीका लगाने का शुभ मुहूर्त....

भाई दूज: भाई को टीका लगाने का शुभ मुहूर्त….

भाई दूज या भैया दूज का त्‍योहार भाई-बहन के अपार प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने भाइयों को घर पर आमंत्रित कर उन्‍हें तिलक लगाकर भोजन कराती हैं। वहीं, एक ही घर में रहने...

हिमाचल में "घरेसू" (कहारू) जलाकर 8 दिन पहले ही हो जाती है दिवाली शुरू

हिमाचल: गाँव में दिवाली का आठ दिन पहले “घरेसू” (कहारू) जलाकर होता है आगाज

बच्चे सूखी घास के पूले का एक लंबा गटठा बनाकर जिसे आम भाषा में घरेसू या कहारू कहा जाता है। शाम को खाना खाने से पहले अंधेरा होने पर घरों से दूर खलियान, खुले मैदान या जगह पर घुमाते हुए जलाया जाता...