त्यौहार व मेले

हिमाचल में "घरेसू" (कहारू) जलाकर 8 दिन पहले ही हो जाती है दिवाली शुरू

हिमाचल: गाँव में दिवाली का आठ दिन पहले “घरेसू” (कहारू) जलाकर होता है आगाज

बच्चे सूखी घास के पूले का एक लंबा गटठा बनाकर जिसे आम भाषा में घरेसू या कहारू कहा जाता है। शाम को खाना खाने से पहले अंधेरा होने पर घरों से दूर खलियान, खुले मैदान या जगह पर घुमाते हुए जलाया जाता...

दिवाली का पौराणिक महत्व, पंच-पर्वों का त्‍यौहार: दीपावली

दिवाली का पौराणिक महत्व, पंच-पर्वों का त्‍यौहार: दीपावली

दीपावली की पूरी रात दीपक प्रज्‍वलित रखते हैं, जिसके संदर्भ में हिन्‍दु धर्म में कई मान्‍यताऐं हैं, जिनमें से कुछ का वर्णन पिछले पोस्‍ट क्‍यों मनाते हैं दीपावली के अन्‍तर्गत किया था। उनके...

धनतेरस से शुरू नरक चतुर्दशी, दीवाली, गोवर्धन पूजा और भाईदूज तक त्यौहारों की धूम

धनतेरस से लेकर भाईदूज तक त्यौहारों की धूम

धनतेरस का पर्व 25 अक्टूबर को इस बार धनतेरस का पर्व 25 अक्टूबर के दिन मनाया जाएगा। धनतेरस से आरंभ होते हुए नरक चतुर्दशी, दीवाली, गोवर्धन पूजा और भाईदूज तक यह त्यौहार उत्साह के साथ मनाया जाता है।...

पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक: करवा चौथ

पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक: करवा चौथ

सभी विवाहित (सुहागिन) महिलाओं के लिये करवा चौथ बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार हैं। ये एक दिन का त्यौहार प्रत्येक वर्ष मुख्यतः उत्तरी भारत की विवाहित (सुहागिन) महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। इस दिन...

ग्राम देवी-देवता के सम्मान में किया जाता है "जागरा"

देवी-देवता के सम्मान में किया जाता है “जागरा”

जागरे का विशेष महत्व इस दिन ग्राम देवी-देवता को किया जाता है घर पर आमन्त्रित हिमाचल देवभूमि है। यहाँ अक्सर देवी-देवताओं की पारम्परिक तरीके से सदियों से पूजा-अर्चना की जाती आ रही है। हर जिले...

कुल्लू : 19 अक्तबूर से शुरू होगा अन्तर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा

देवी-देवताओं के महासंगम का गवाह : कुल्लू दशहरा

कुल्लू के दशहरे का अपना इतिहास, पृष्ठभूमि व सांस्कृतिक परम्परा कुल्लू में दशहरे का शुभारंभ 17वीं शताब्दी में हुआ देश भर में मनाया जाने वाला दशहरा पर्व जहां आसुरी शक्तियों पर दैवी शक्तियों की...

कुल्लू दशहरे का इतिहास

कुल्लू दशहरे का इतिहास…

दशहरे का प्रारम्भ कुल्लू में विजयदशमी का उत्सव तब प्रारम्भ होता है जब देश के अन्य भागों में रावण का बुत जल चुका होता है। उत्सव आश्विन शुक्ल दसवीं से आरम्भ होकर एक सप्ताह बाद पूर्णिमा को...