त्यौहार व मेले

“महाशिवरात्रि” के शुभ महूर्त व अन्य जानकारी : कालयोगी आचार्य महेंद्र शर्मा

“महाशिवरात्रि” के शुभमुहूर्त व अन्य जानकारी : कालयोगी आचार्य महेंद्र शर्मा

महाशिवरात्रि के दिन शुभ काल के दौरान ही महादेव और पार्वती की पूजा की जानी चाहिए। रात्रि चारों पहर करनी चाहिए। तभी इसका फल मिलता है। महाशिवरात्रि पर रात्रि में चार बार शिव परिवार पूजन की...

"मंडी की अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि" धार्मिक, संस्कृतिक व पुरातात्विक का प्रतीक

“मंडी की अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि” धार्मिक, सांस्कृतिक व पुरातात्विक का प्रतीक

उत्तर-पश्चिमी भारत में भगवान शिव की पौराणिक गाथाएं गहरी जड़े जमाए हुए पूरे देश में शिवरात्रि का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन हिमाचल जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है यहां के...

ग्राम देवी-देवता के सम्मान में किया जाता है "जागरा"

देवी-देवता के सम्मान में किया जाता है “जागरा”

जागरे का विशेष महत्व इस दिन ग्राम देवी-देवता को किया जाता है घर पर आमन्त्रित हिमाचल देवभूमि है। यहाँ अक्सर देवी-देवताओं की पारम्परिक तरीके से सदियों से पूजा-अर्चना की जाती आ रही है। हर जिले...

हिमाचल का सबसे पुराना व्यापारिक मेला "लवी"

हिमाचल के रामपुर का अंतरराष्ट्रीय मेला “लवी”

 रामपुर शहर का लवी मेला हिमाचल प्रदेश मेलों व त्यौहरों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। हर त्यौहार और मेले की अपनी एक खास महत्ता है। इतना ही नहीं बल्कि कुछ खास मेले व त्यौहार  देश में ही नहीं...

करवा चौथ व्रत नियम, पूजा का शुभ मुहूर्त व पूजा-विधि : आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा

करवा चौथ व्रत नियम, पूजा का शुभ मुहूर्त व पूजा-विधि : आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा

करवाचौथ की पूजा करवा चतुर्थी को की जाती है। पूजा मिट्टी के करवे से की जाती है। 8 अक्टूबर को करवा चौथ है, यह व्रत कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष के चतुर्थी का रखा जाता है। इस दिन सारी सुहागवती औरतें...

पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक: करवा चौथ

पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक: करवा चौथ

सभी विवाहित (सुहागिन) महिलाओं के लिये करवा चौथ बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार हैं। ये एक दिन का त्यौहार प्रत्येक वर्ष मुख्यतः उत्तरी भारत की विवाहित (सुहागिन) महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। इस दिन...

इतिहास: कुल्लू दशहरे का आरम्भ देवी हिडिम्बा के आगमन के बिना सम्भव नहीं

इतिहास: कुल्लू दशहरे का आरम्भ देवी हिडिम्बा के आगमन के बिना सम्भव नहीं

विजयदशमी के मुख्य उत्सव का आरम्भ देवी हिडिम्बा के आगमन के बिना सम्भव नहीं होता। ढूंगरी (मनाली) से हिडिम्बा के पहुंचे बिना कोई कार्यवाही आरम्भ नहीं हो सकती। रघुनाथजी रथ-यात्रा के लिए नहीं...