हिम धरोहर व इतिहास

हिमाचल की बोलियां : चार कोस पर बदले पाणी, आठ कोस पर बदले वाणी

लाहुल-स्पीति की संस्कृति, रहन सहन व धर्म ….

लाहुल-स्पीति में बौद्ध धर्म का इतिहास यहां के लोगों का रहन-सहन और यहां के लोगों का धर्म भारत में भोट बौद्ध संस्कृति को सीमावर्ती बौद्धों ने ही कर रखा है सुरक्षित लाहुल स्पीति, लद्दाख, किन्नौर,...

हिमाचल : पर्यटन को विकसित करने के लिए 1900 करोड़ स्वीकृत, स्थानीय युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोज़गार के अवसर

हिमाचल: ऐतिहासिक, पारम्परिक व सांस्कृतिक पहचान दर्शाती चौपाल की “वेशभूषा”

देश की बात हो या प्रदेश की उसकी जीवन शैली की पहचान वहां के रहने वाले लोगों, वेशभूषा, खानपान व आभूषणों से होती है। हांलाकि काफी समय से हमारे कई पारम्परिक परिधान और आभूषण लुप्त होते जा रहे हैं।...

पुरानी पहाड़ी रियासत के आपसी संबंध और सीमा विवाद "बुशैहर"

पुरानी पहाड़ी रियासत के आपसी संबंध और सीमा विवाद “बुशैहर”

शिमला की पहाड़ी रियासतों में सबसे बड़ी रियासत बुशैहर ”बशहर”   हिमाचल प्रदेश का अपना प्राचीन इतिहास रहा है। वहीं अगर पुरानी पहाड़ी रियासतों  के आपसी संबंध और सीमा विवाद की बात की जाए तो वो...

हिमाचल के सबसे दूर-दराज "डोडरा-क्वार" का इतिहास,संस्कृति व पर्यटन

“डोडरा-क्वार” अपने इतिहास,संस्कृति व पर्यटन के लिए विख्यात

डोडरा-क्वार की सांस्कृतिक यात्रा खेत-खलियान और बड़े बड़े हरे पेड़ पौधों में अपनेपन का एहसास हिमाचल अपने सौंदर्य, इतिहास,संस्कृति व पर्यटन के लिए अपनी विश्वभर में शानदार पहचान बनाए हुए है। ये...

शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं के आंचल में बसा, स्वर्ण कलशों से सुसज्जित मंदिर “माँ चिंतपूर्णी”

शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं के आंचल में बसा, स्वर्ण कलशों से सुसज्जित मंदिर “माँ चिंतपूर्णी”

त्रिर्गत के तीन शक्तिपीठों में ज्वालाजी, वज्रेश्वरी और चिंतपूर्णी उल्लेखनीय शक्तिपीठ पहला स्थान माता वैष्णों देवी को दिया जाता है, जो जम्मू-कश्मीर में पड़ता है स्वर्ण कलशों से सजा...

हिमाचल के पुरानी पहाड़ी रियासतों के आपसी सम्बंध और सीमा विस्तार

हिमाचल की पुरानी पहाड़ी रियासतों के आपसी सम्बंध और सीमा विस्तार

राजपूती रियासती काल से पूर्व लम्बे समय तक उत्तर पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्र में छोटी-छोटी ठकुराइन और रणौहतों में यह भाग बंटा रहा। इन रणौहतों का युग विभिन्न स्थानों पर विभिन्न समय तक रहा। इनकी...

कभी "चीनी गांव" के नाम से जाना जाता था किन्नौर जिले का "कल्पा"

कभी देवी चंडिका का आगमन हुआ था “कल्पा” में

कभी “चीनी गांव” के नाम से जाना जाता था किन्नौर जिले का “कल्पा” आज का किन्नौर जिले का कल्पा ही कभी चीनी गांव के नाम से प्रसिद्ध था। पर्यटक चीनी गांव आज भी अपनी समृद्ध विरासत और परंपरा के...