हिम धरोहर व इतिहास

"श्री रघुनाथ" मन्दिर कुल्लू का इतिहास

“श्री रघुनाथ” मन्दिर कुल्लू का इतिहास

श्री रघुनाथ मन्दिर मंदिर की विशेषता, भगवान रघुनाथ जी के विषय में जानकारी आज भी जगतसिंह के वंशज का बड़ा सुपुत्र श्री रघुनाथ जी का छड़ीदार हिमाचल देवभूमि है। यहां पर अनेकों देवी-देवताओं का वास...

शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं के आंचल में बसा, स्वर्ण कलशों से सुसज्जित मंदिर “माँ चिंतपूर्णी”

शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं के आंचल में बसा, स्वर्ण कलशों से सुसज्जित मंदिर “माँ चिंतपूर्णी”

त्रिर्गत के तीन शक्तिपीठों में ज्वालाजी, वज्रेश्वरी और चिंतपूर्णी उल्लेखनीय शक्तिपीठ पहला स्थान माता वैष्णों देवी को दिया जाता है, जो जम्मू-कश्मीर में पड़ता है स्वर्ण कलशों से सजा...

हिमाचल: चम्बा से भरमौर तक "शिवपुरी".....

हिमाचल: चम्बा से भरमौर तक “शिवपुरी”…..

चम्बा से भरमौर तक के क्षेत्र को शिवपुरी कहा गया है। चम्बा के तीस किलोमीटर आगे रावी के दाएं किनारे गूं कोठी के शिव मंदिर के शिलालेख (मेरुवर्मन 680 ई.) में इस मंदिर को शिवपुरी के मध्य स्थित माना है।...

हिमाचल की ऐतिहासिक धरोहर की अनमोल विरासत "वायसरीगल लॉज"

हिमाचल की ऐतिहासिक धरोहर की अनमोल विरासत “वायसरीगल लॉज”

यहीं हुआ था 1972 का ‘शिमला समझौता’ वायसरीगल लॉज ऐतिहासिक घटनाओं एवं नैसर्गिक श्रृंगार के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध इस ऐतिहासिक भवन को स्वतन्त्रता से पूर्व भारत के वायसराय व गवर्नर जनरल लार्ड...

हिन्दू इतिहास की कई कहानियां अपने में समेटे हुए है कांगड़ा किला

इतिहास की कई कहानियां अपने में समेटे हुए “कांगड़ा किला”

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा घाटी में स्थित कांगड़ा किला और कांगड़ा राज्य की सीमाओं के नजदीक सुजानपुर किला अपनी ख़ास अहमियत लिए हुए है। कांगड़ा हिमाचल प्रदेश का ऐतिहासिक नगर व जिला है। प्राचीन...

आधुनिकता भरे माहौल में आज भी परंपरागत गहनों को सजीव रखे ... किन्नौरी महिलाओं का श्रृंगार

श्रृंगार और परिधान “किन्नौर” की परंपरा के विशेष परिचायक

आधुनिकता भरे माहौल में आज भी परंपरागत गहनों को सजीव रखे … किन्नौरी महिलाओं का श्रृंगार सिर से पांव तक गहनों से लदी किन्नौरी महिलाओं का श्रृंगार इनकी संस्कृति की सजीवता का प्रतीक  हिमाचल के...

हिमाचल के पुरानी पहाड़ी रियासतों के आपसी सम्बंध और सीमा विस्तार

हिमाचल की पुरानी पहाड़ी रियासतों के आपसी सम्बंध और सीमा विस्तार

राजपूती रियासती काल से पूर्व लम्बे समय तक उत्तर पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्र में छोटी-छोटी ठकुराइन और रणौहतों में यह भाग बंटा रहा। इन रणौहतों का युग विभिन्न स्थानों पर विभिन्न समय तक रहा। इनकी...