हिम धरोहर व इतिहास

रामपुर बुशहर में स्थित तिब्बतीयन शैली में निर्मित दुम्ग्युर नामक बौद्ध मंदिर

रामपुर बुशहर में स्थित तिब्बतीयन शैली में निर्मित दुम्ग्युर बौद्ध मंदिर

बुशहर रियासत के टीका रघुनाथ सिंह ने सन 1895 ई. को स्थापित करवाया शिमला जिला के रामपुर उपमंडल में समुद्रतल से 1000 मीटर की ऊंचाई पर बौद्ध मंदिर रामपुर बस स्टैंड के पास स्थित है। रामपुर में तिब्बतीयन...

हिमाचल की ऐतिहासिक धरोहर की अनमोल विरासत "वायसरीगल लॉज"

हिमाचल की ऐतिहासिक धरोहर की अनमोल विरासत “वायसरीगल लॉज”

यहीं हुआ था 1972 का ‘शिमला समझौता’ वायसरीगल लॉज ऐतिहासिक घटनाओं एवं नैसर्गिक श्रृंगार के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध इस ऐतिहासिक भवन को स्वतन्त्रता से पूर्व भारत के वायसराय व गवर्नर जनरल लार्ड...

"शिमला" शहर को "स्मार्ट सिटी" के आधार पर विकसित करने के लिए बनेगी योजनाएं

ऐतिहासिक इमारतों की नगरी व खूबसूरत वादियों से लबालब “शिमला”

कुछ वर्षों में हिमाचल प्रदेश ने पर्यटकों के लिए बहुत आकर्षक, विवधिता से पूर्ण, मनोहरी दृश्यों से पूर्ण, पर्वतारोहण, खोज पूर्ण, पर्वत भ्रमण स्थानों से भरपूर अदभूत प्रदेश की ख्याति प्राप्त कर...

धार्मिक संस्थानों के संरक्षण के लिए हिमाचल सरकार ने किया निधि का सृजन

हिमाचल मन्दिरों की प्राचीन शैली आज भी जीवित

हिमाचल प्रदेश की प्राचीन कलाएं, मंदिरों के वास्तुशिल्प, लकड़ी पर खुदाई, पत्थरों और धातुओं की मूर्तियों तथा चम्बा रूमाल आदि के रूप में आज भी सुरक्षित है। इन कलाओं को तीन मुख्य वर्गों में बांटा...

वशिष्ठ- पुरानी कुल्लुई काठकुणी शैली के हैं सभी मकान

हिमाचल की पौराणिक स्मृतियों को संजोए महर्षि वशिष्ठ का तपस्या स्थल “वशिष्ठ”

हिमाचल प्रदेश के मनाली से करीब चार किलोमीटर दूर लेह राजमार्ग पर स्थित है वशिष्ठ। एक ऐसा गांव जो अपने दामन में पौराणिक स्मृतियां छुपाये हुए है। महर्षि वशिष्ठ ने इसी स्थान पर बैठकर तपस्या की...

पश्चिम हिमालय के राणा-राजा

राणा और ठाकुर अभी तक पुरानी उपाधि धारण किए

गणतन्त्र, जनपद राज्य प्रणाली में समय के साथ ह्रास हो गया। उनके प्रधान अथवा अन्य प्रमुख व्यक्ति शक्तिशाली बन गए। यही प्रधान, प्रमुख ठाकुर, राणा कहलाने लगे और छोटे इलाकों पर काब्ज होने लगे।...

“देव कमरूनाग” ...यहां स्थानीय ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के लोग भी होते हैं नतमस्तक

“देव कमरूनाग” … स्थानीय ही नहीं, देश-विदेश के लोग नतमस्तक

  कमरूनाग झील में समाया है अपार खजाना परंपरा के कारण सिक्कों और अमूल्य धातुओं का भारी भंडार हिमाचल को देवभूमि के नाम से ना केवल देशों में अपितु विदेशों में भी जाना जाता है। यहाँ हर देवी-...