हिम धरोहर व इतिहास

हिमाचली धाम नहीं है आम

नहीं है आम म्हारी… हिमाचली “धाम”

देवभूमि हिमाचल प्रदेश जहां देश-विदेश में अपनी धर्म आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य, लोक संस्कृति, त्यौहार, व मेलों जैसी आलौकिक संस्कृति व रीति-रिवाजों के लिए विख्यात है, वहीं हिमाचल प्रदेश अपने...

हिमाचल के सबसे दूर-दराज "डोडरा-क्वार" का इतिहास,संस्कृति व पर्यटन

“डोडरा-क्वार” अपने इतिहास,संस्कृति व पर्यटन के लिए विख्यात

डोडरा-क्वार की सांस्कृतिक यात्रा खेत-खलियान और बड़े बड़े हरे पेड़ पौधों में अपनेपन का एहसास हिमाचल अपने सौंदर्य, इतिहास,संस्कृति व पर्यटन के लिए अपनी विश्वभर में शानदार पहचान बनाए हुए है। ये...

वृद्धजनों के सपने होंगे ‘देव भूमि दर्शन’ योजना से साकार

हिमाचल मन्दिरों की प्राचीन शैली..

हिमाचल प्रदेश की प्राचीन कलाएं, मंदिरों के वास्तुशिल्प, लकड़ी पर खुदाई, पत्थरों और धातुओं की मूर्तियों तथा चम्बा रूमाल आदि के रूप में आज भी सुरक्षित है। इन कलाओं को तीन मुख्य वर्गों में बांटा...

महाभारत के इतिहास से जुड़ा खेल, नृत्य व नाट्य का सम्मिश्रण ठोडा

महाभारत के इतिहास से जुड़ा “ठोडा” खेल

कौरवों व पांडवों की यादें पर्वतीय क्षेत्रों में अभी तक रची-बसी दुनिया में तीरंदाजी की कितनी ही शैलियां हैं मगर हिमाचल व उत्तराखंड की पर्वतावलियों के बाशिंदों की यह तीरकमानी अद्भुत व निराली...

हिमाचल के पहाड़ी गांधी कांशी बाबा का गांव "डाडासीबा"

हिमाचल के पहाड़ी गांधी कांशी बाबा का गांव “डाडासीबा”

पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम की जन्मस्थली डाडासीबा डाडासीबा का ऐतिहासिक गीत -डाडे दी बेडिये सौकणी तू मेरिए आज भी हर व्यक्ति की जुबान पर राजाओं के समय डाडासीबा, एक नगरी पूरी बुलंदियों पर थी।...

हिमाचल प्रदेश के पैगोड़ा शैली में बने मंदिर

हिमाचल प्रदेश के पैगोड़ा शैली में बने मंदिर

हिमाचल प्रदेश के मण्डी, कुल्लू, किन्नौर, शिमला के पर्वतीय क्षेत्रों में पैगोड़ा शैली के असंख्य मंदिर हैं। राजा बाणसेन द्वारा 1346 में निर्मित मण्डी का पराशर मंदिर, मनाली का हिडिम्बा मंदिर जिसे...

हिमाचल : पर्यटन को विकसित करने के लिए 1900 करोड़ स्वीकृत, स्थानीय युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोज़गार के अवसर

ऐतिहासिक, पारम्परिक व सांस्कृतिक पहचान दर्शाती चौपाल की “वेशभूषा”

देश की बात हो या प्रदेश की उसकी जीवन शैली की पहचान वहां के रहने वाले लोगों, वेशभूषा, खानपान व आभूषणों से होती है। हांलाकि काफी समय से हमारे कई पारम्परिक परिधान और आभूषण लुप्त होते जा रहे हैं।...