हिम धरोहर व इतिहास

हिमाचल : पर्यटन को विकसित करने के लिए 1900 करोड़ स्वीकृत, स्थानीय युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोज़गार के अवसर

ऐतिहासिक, पारम्परिक व सांस्कृतिक पहचान दर्शाती चौपाल की “वेशभूषा”

देश की बात हो या प्रदेश की उसकी जीवन शैली की पहचान वहां के रहने वाले लोगों, वेशभूषा, खानपान व आभूषणों से होती है। हांलाकि काफी समय से हमारे कई पारम्परिक परिधान और आभूषण लुप्त होते जा रहे हैं।...

हिमाचल के सबसे दूर-दराज "डोडरा-क्वार" का इतिहास,संस्कृति व पर्यटन

“डोडरा-क्वार” अपने इतिहास,संस्कृति व पर्यटन के लिए विख्यात

डोडरा-क्वार की सांस्कृतिक यात्रा खेत-खलियान और बड़े बड़े हरे पेड़ पौधों में अपनेपन का एहसास हिमाचल अपने सौंदर्य, इतिहास,संस्कृति व पर्यटन के लिए अपनी विश्वभर में शानदार पहचान बनाए हुए है। ये...

पश्चिम हिमालय के राणा-राजा

राणा और ठाकुर अभी तक पुरानी उपाधि धारण किए

गणतन्त्र, जनपद राज्य प्रणाली में समय के साथ ह्रास हो गया। उनके प्रधान अथवा अन्य प्रमुख व्यक्ति शक्तिशाली बन गए। यही प्रधान, प्रमुख ठाकुर, राणा कहलाने लगे और छोटे इलाकों पर काब्ज होने लगे।...

रामपुर बुशहर में स्थित तिब्बतीयन शैली में निर्मित दुम्ग्युर नामक बौद्ध मंदिर

रामपुर बुशहर में स्थित तिब्बतीयन शैली में निर्मित दुम्ग्युर बौद्ध मंदिर

बुशहर रियासत के टीका रघुनाथ सिंह ने सन 1895 ई. को स्थापित करवाया शिमला जिला के रामपुर उपमंडल में समुद्रतल से 1000 मीटर की ऊंचाई पर बौद्ध मंदिर रामपुर बस स्टैंड के पास स्थित है। रामपुर में तिब्बतीयन...

कुल्लू : 19 अक्तबूर से शुरू होगा अन्तर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा

देवी-देवताओं के महासंगम का गवाह : कुल्लू दशहरा

कुल्लू के दशहरे का अपना इतिहास, पृष्ठभूमि व सांस्कृतिक परम्परा कुल्लू में दशहरे का शुभारंभ 17वीं शताब्दी में हुआ देश भर में मनाया जाने वाला दशहरा पर्व जहां आसुरी शक्तियों पर दैवी शक्तियों की...

सराहन में गिरा था सती का कान, जिससे प्रकट हुईं “माता भीमाकाली”

सराहन में गिरा था सती का कान, जिससे प्रकट हुईं “माता भीमाकाली”

प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण सराहन : लेखक : डॉ. सूरत ठाकुर मार्कण्डेय पुराण में “माता भीमाकाली” वर्णन मार्कण्डेय पुराण में वर्णन : राक्षसों के विनाश के लिए मैं हिमाचल भूमि में भीम रूप में...

शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं के आंचल में बसा, स्वर्ण कलशों से सुसज्जित मंदिर “माँ चिंतपूर्णी”

शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं के आंचल में बसा, स्वर्ण कलशों से सुसज्जित मंदिर “माँ चिंतपूर्णी”

त्रिर्गत के तीन शक्तिपीठों में ज्वालाजी, वज्रेश्वरी और चिंतपूर्णी उल्लेखनीय शक्तिपीठ पहला स्थान माता वैष्णों देवी को दिया जाता है, जो जम्मू-कश्मीर में पड़ता है स्वर्ण कलशों से सजा...