हिम धरोहर व इतिहास

प्रारंभ में एक छोटा सा गांव था "शिमला"

कभी एक छोटा सा गांव था “शिमला”

शिमला हिल स्टेट्स ‘श्यामला’ से लिया गया शिमला का नाम 1808-1809 ई. में सिक्खों और गोरखों की लड़ाई के बाद शिमला से जुड़ा अंग्रेजों का संबंध “शिमला” न केवल हिमाचल की राजधानी है अपितु भारत की शान भी है...

हिमाचल के सबसे दूर-दराज "डोडरा-क्वार" का इतिहास,संस्कृति व पर्यटन

“डोडरा-क्वार” अपने इतिहास,संस्कृति व पर्यटन के लिए विख्यात

डोडरा-क्वार की सांस्कृतिक यात्रा खेत-खलियान और बड़े बड़े हरे पेड़ पौधों में अपनेपन का एहसास हिमाचल अपने सौंदर्य, इतिहास,संस्कृति व पर्यटन के लिए अपनी विश्वभर में शानदार पहचान बनाए हुए है। ये...

हिन्दू इतिहास की कई कहानियां अपने में समेटे हुए है कांगड़ा किला

इतिहास की कई कहानियां अपने में समेटे हुए “कांगड़ा किला”

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा घाटी में स्थित कांगड़ा किला और कांगड़ा राज्य की सीमाओं के नजदीक सुजानपुर किला अपनी ख़ास अहमियत लिए हुए है। कांगड़ा हिमाचल प्रदेश का ऐतिहासिक नगर व जिला है। प्राचीन...

सराहन में गिरा था सती का कान, जिससे प्रकट हुईं “माता भीमाकाली”

सराहन में गिरा था सती का कान, जिससे प्रकट हुईं “माता भीमाकाली”

प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण सराहन : लेखक : डॉ. सूरत ठाकुर मार्कण्डेय पुराण में “माता भीमाकाली” वर्णन मार्कण्डेय पुराण में वर्णन : राक्षसों के विनाश के लिए मैं हिमाचल भूमि में भीम रूप में...

बौद्ध धर्म के पुनरूत्थान के सम्बंध में गुगे राज्य का अभूतपूर्व योगदान

“लामा धर्म” आज भी अपनी ख्याति के साथ विद्यमान

तिब्बत, हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिलों किन्नौर तथा लाहुल-स्पिति में बौद्ध धर्म अपनी विलक्षणता के साथ विद्यमान है। गेरूआ वस्त्र पहने लामा, ऊंचाईयों में स्थित बौद्ध मठ, आकर्षक मूर्तियां व...

रामपुर बुशहर में स्थित तिब्बतीयन शैली में निर्मित दुम्ग्युर नामक बौद्ध मंदिर

रामपुर बुशहर में स्थित तिब्बतीयन शैली में निर्मित दुम्ग्युर बौद्ध मंदिर

बुशहर रियासत के टीका रघुनाथ सिंह ने सन 1895 ई. को स्थापित करवाया शिमला जिला के रामपुर उपमंडल में समुद्रतल से 1000 मीटर की ऊंचाई पर बौद्ध मंदिर रामपुर बस स्टैंड के पास स्थित है। रामपुर में तिब्बतीयन...

हिमाचल के गुज्जरों का जनजाति जीवन

हिमाचल के गुज्जर जनजाति की अपनी अलग पहचान

हिमाचल के गुज्जरों का जनजातीय जीवन   हिमाचल प्रदेश में लाहौल-स्पीति, किन्नौर, पांगी और भरमौर (चम्बा) के मूल वासियों को जन-जाति (schedules Tribes) की संज्ञा दी गई है। दूरस्थ, कटा हुआ, सुख-सुविधाओं में कमी और...