सम्पादकीय

लॉकडाउन खत्म होने के बाद से कोरोना मामलों में पूरे देश में लगातार इजाफा, हालात बद से बदतर

लॉकडाउन खत्म होने के बाद से कोरोना मामलों में पूरे देश में लगातार इजाफा, हालात बद से बदतर…

भारत में कोरोना संक्रमण के हर दिन नए रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े कोरोना से आम आदमी की हालत बहुत खराब भले ही ठीक होने वालों की तादाद बढ़ रही हो, लेकिन बढ़ रहे आंकड़े व मरने वालों की संख्या में इजाफा चिंता का...

किसे कोसें, किसे पीड़ा बताएं, किससे मदद मांगे..गोलमाल है भाई, सब गोलमाल है

किसे कोसें, किसे पीड़ा बताएं, किससे मदद मांगे..गोलमाल है भाई, सब गोलमाल है

… सब किसी न किसी उलझन में उलझे हुए   कुछ यूं चल रही है मेरे देश की विकासात्मक वायदों की धारा….! बीसियों कहानियां होंगी 2020 की! जिन्हें सदियों तक याद किया जाएगा। जी हां! 2020 विश्वभर के लिए बहुत ही...

कोरोना ने कैसा वक्त दिखाया: कोई नियम-कायदों की साख पर, तो कोई ओहदों की धाक पर...

कोई नियम-कायदों की साख पर, तो कोई ओहदों की धाक पर…

कोरोना से लड़ाई लड़ने के लिए इस वक्त किसी भी तरह की राजनीति और ओहदे का फायदा उठाकर नियमों की अवहेलना तो बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। इस वक्त पूरा विश्व कोरोना की लड़ाई लड़ रहा है। ऐसे में हमारा देश...

हिमाचल में शाम सात बजे से सुबह सात बजे तक बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों की नहीं होगी एंट्री

कोरोना : बहुत से देशों को संभलने का मौका नहीं मिला, हमें मिला है…”हमें कुछ नहीं हो सकता” ऐसे आडंबर, अहंकार और मज़ाक को छोड़ दीजिए!  प्रशासन और सरकार के सहयोगी बनें 

जरूरत है हमें समय रहते सजग होने की जीवन सभी का बहुत अनमोल है। इस वक्त पूरा विश्व कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है। इस महामारी ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। आए दिन बढ़ते मौत के आंकड़े...

क्यों जल उठी “दिल्ली”? बरसों साथ रहते “इंसान” अचानक बन गए “हिंदू-मुसलमान” 

…क्यों दहक उठी “दिल्ली” ? दिल्ली की हिंसा अचानक तो नहीं हुई…! सवाल..! आखिर बसे बसाये शहर को उजाड़ने वाले दंगाई कौन थे? किसकी साजिश थी? दिल्ली में नागरिकता संशोधन एक्ट के नाम पर हुई हिंसा की...

एक तरफ महिला सशक्तिकरण तो दूसरी ओर महिलाओं पर देश की लचर कानून व्यवस्था भारी

एक तरफ महिला सशक्तिकरण तो दूसरी ओर महिलाओं पर देश की लचर कानून व्यवस्था भारी

…आज जो हुआ है वह मिसाल, ऐसे अपराधियों का अंजाम यही होना चाहिए आम आदमी की सुरक्षा का जिम्मा हर पुलिस की नैतिक जिम्मेदारी इस प्रकार के मामलों में हर राज्य की पुलिस को तेलंगाना पुलिस से सीख लेने...

“घर" तो वही है जिसमें बचपन में हम सब रहा करते थे, पर अब इस "मकान" में लोग कोई और रहते हैं...

…चलो किसी दिन यूँ करें कि बचपन से ही मिल आएं

बचपन” कभी भी नहीं भूलता। चाहे सुख में कटा हो या दुःख में। भाई-बहन का प्यार, आस-पड़ोस, स्कूल, दोस्त और बड़े-बुजुर्ग सब याद रहते हैं। बचपन में मिट्टी-पत्थरों के छोटे-छोटे घर बनाना, छुपन-छुपाई खेलना,...